संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। जनपद की 496 ग्राम पंचायतों में से 282 में महिला प्रधान हैं। लेकिन, जिम्मेदारी उनके पति संभाल रहे हैं। अब इन महिला प्रधानों की समस्या बढ़ सकती है। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित समिति ने प्रधानी के परोक्ष संचालन पर रोक लगाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय से दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है।
चुनाव के दौरान भले ही महिलाओं ने जनसंपर्क किया, लेकिन वह केवल हाथ जोड़े नजर आईं। असल चुनावी योद्धा की भूमिका में उनके पति या समर्थक रहे। चुनाव जीतने के बाद भी यही आलम रहता है। महिलाएं सिर्फ नाम की प्रधान रहती हैं। पंचायती राज की बैठक हो या फिर ब्लॉक स्तर की, सब में सवालों के जवाब उनके पति ही देते हैं। अधिकांश महिला प्रधान सिर्फ अपनी उपस्थिति ही दर्ज कराती हैं। विकास कार्यों के निर्धारण में भी उनके पति या बेटे ही आगे रहते हैं।
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यह है प्रधान का दायित्व : ग्राम पंचायत में सभी प्रकार के कार्य करने का अधिकार प्रधान के पास होता है। प्रधान का कार्य पंचायत के सभी विकास कार्यों को सुनिश्चित करना, बजट तैयार करना, और पंचायती राज के नियमों के अनुसार करना होता है।
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पति को आगे कर देती हैं महिला प्रधान : ज्यादातर महिला प्रधान घरेलू कामकाज में व्यस्त होती हैं। गांव का कोई व्यक्ति किसी काम के लिए उनके दरवाजे पर पहुंचता है तो महिला प्रधान के बजाय उनके पति बात करते हैं। कई महिला प्रधान तो ऐसी हैं जो समस्या सुनकर घबरा जाती हैं और मामला समझने के लिए पति को आगे कर देती हैं। 00000000
शैक्षिक योग्यता व दंड लगाने की सिफारिश : ग्राम पंचायतों में महिला प्रधान के पति और रिश्तेदारों की ओर से चलाए जा रहे शासन पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित समिति ने हाल में पंचायती राज मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें परोक्ष प्रधानी चलाने पर अर्थदंड लगाने के साथ महिला प्रधान की शैक्षिक योग्यता निर्धारित करने, बैठकों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने सहित कई सिफारिशें की हैं।
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कक्षा 10 तक पढ़ी हूं। मुझे प्रधानी का काम मालूम है। मैं स्वयं ही सारे कार्य करती हूं। मैंने अपने गांव के लोगों को शिक्षित बनाने के लिए जागरूक करने के साथ मूलभूत सुविधाओं का लाभ दिलाया है। मेरे पति गांव में चल रहे कार्यों की देखरेख में मदद करते हैं। लेकिन, मैं भी कार्य की गुणवत्ता परखने जाती हूं।
अंजली रहीश यादव, प्रधान, डगरवाहा
कक्षा पांच तक पढ़ी हूं और छोटे मोटे काम कर लेती हूं। लेकिन, विकास के कार्याें को लेकर मुझे पति का सहयोग लेना पड़ता है। कार्य कैसे कराना है, वह इसे बेहतर तरीके से जानते हैं। इसलिए अधिकांश कामों में मुझे उनके सहयोग की जरूरत रहती है। प्रधान रहते हुए मैंने कई कार्य कराए हैं।
भारती, प्रधान, राजापुर
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महिलाओं को आगे आकर बेझिझक बोलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। लेकिन, पति बिना महिला प्रधान आगे बढ़ने का नाम नहीं ले रही हैं। यदि वह खुद आगे बढ़कर आएं तो गांवों में बड़ा बदलाव नजर आएगा।
डाॅ. बालगोविंद श्रीवास्तव, जिला पंचायत राज अधिकारी