पैदा होने से पहले ही किसी बेटी को गर्भ में मौत की नींद न सुला दिया जाए, इसका बीड़ा मध्य प्रदेश की दो महिला अफसरों ने उठाया। यहां तक कि ऑपरेशन को पूरी तरह से गोपनीय रखने के लिए नायब तहसीलदार खुद गर्भवती बन गईं और डिप्टी कलक्टर दीपशिखा के साथ झांसी पहुंचकर कर दिया खेल का खुलासा।
मध्य प्रदेश प्रशासन द्वारा ग्वालियर में महिला संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए पिंक सेल संचालित की जा रही है। सेल को लगातार इनपुट मिल रहा था कि ग्वालियर की महिलाएं झांसी आकर लिंग परीक्षण करा रही हैं। गर्भ में बेटी का भ्रूण होने पर गर्भपात करा दिया जाता है। इसके खुलासे का वहां तैनात डिप्टी कलक्टर दीपशिखा और नायब तहसीलदार वंदना यादव ने बीड़ा उठाया। इसकी किसी को भनक न लगे, इसके लिए नायब तहसीलदार खुद गर्भवती बन गईं। अपनी पहचान छुपाते हुए सबसे पहले उन्होंने ग्वालियर की कुछ महिलाओं से संपर्क किया, जिनके जरिये जानकारी मिली कि एक आंगनबाड़ी सहायिका के साथ महिलाएं झांसी जाकर लिंग परीक्षण कराती हैं।
नायब तहसीलदार ने आंगनबाड़ी सहायिका से संपर्क किया। उसे बताया कि वो बेटी नहीं चाहती हैं, इसलिए लिंग परीक्षण कराना है। सहायिका का विश्वास जमने पर वो उसे झांसी लेकर आईं। यहां सहायिका ने मेडिकल कॉलेज के पास सड़क पर एक दलाल से मुलाकात कराई। दस हजार रुपये में सौदा तय हुआ। दलाल ने कहा कि उनके साथ और कोई नहीं चल सकता है। उन्हें अकेले स्कूटर पर उसके साथ सेंटर तक चलना होगा। नायब तहसीलदार ने इसके लिए हामी भर दी और बैठ गईं स्कूटर पर। जबकि, यहां पहले से ही डिप्टी कलक्टर दीपशिखा के साथ टीम डेरा डाल चुकी थी। स्कूटर के पीछे टीम के सभी सदस्य पैदल अलग-अलग होकर आगे बढ़ दिए। नायब तहसीलदार के सेंटर के अंदर घुसते ही टीम ने इर्दगिर्द डेरा डाल लिया और अल्ट्रासाउंड की कार्यवाही शुरू होते ही छापा मार दिया।
इसमें स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग लिया। लेकिन, स्थानीयता की वजह से पहचान उजागर न हो, इसके लिए उन्हें पीछे रखा गया। छापामारी के दौरान नगर मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल, एसीएम वान्या सिंह व जिला प्रोबेशन अधिकारी भी मौजूद रहे।