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बदलते वक्त के साथ कदमताल कर रही हैं महिलाएं

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झांसी। अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत शनिवार को ‘महिला सशक्तीकरण’ विषय पर विचार गोष्ठी हुई, जिसमें उपस्थित महिलाओं ने कहा कि बदलते वक्त के साथ महिलाएं पूरी तरह से कदमताल कर रही हैं। एक ओर जहां वे देश की सीमाओं की रखवाली कर रही हैं, तो वहीं चंद्रयान जैसे मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई हैं। बावजूद, समाज के एक बड़े तबके में अब भी बेटियां उपेक्षित हैं। इसमें बदलाव की आवश्यकता है। इस दौरान नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ भी ली गई।
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संस्था जेसीआई झांसी वीरांगना के सहयोग से एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में संस्था की अध्यक्ष आभा शुक्ला ने कहा कि बेटियों के प्रति लोगों की सोच में काफी परिवर्तन आया है। लेकिन, समाज एक बड़ा तबका अब भी बेटा और बेटी में फर्क करता है। इस सोच में बदलाव की बड़ी आवश्यकता है। ये केवल सरकारी प्रयासों से ही संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए हम सबको आगे आना होगा। अपर्णा दुबे ने कहा कि खेल हो या देश की सीमाओं की सुरक्षा, सभी मोर्चों पर महिलाओं ने खुद को साबित किया है। कोई भी बेटी पीवी सिंधू बन सकती है, आवश्यकता तो उत्साहवर्धन की है। हेमा पालरवाले ने कहा कि हमें केवल अपनी बेटियों की पढ़ाई तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के वंचित वर्ग की बेटियों का भी ख्याल रखना चाहिए। देश की तरक्की के लिए सभी का आगे बढ़ना जरूरी है। आराधना आनंदानी ने कहा कि बेटियां एक नहीं, बल्कि दो परिवारों को रोशन करती हैं। इसलिए उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। शिक्षित महिला ही शिक्षित परिवार और समाज का निर्माण करती है।
इस दौरान कंचन सक्सेना, वंदना राय, ममता प्रदीप गुप्ता, कविता शर्मा, प्राची गुप्ता, संगीता जैन, तृप्ति अग्रवाल, प्रीति जैन, आरती कुशवाहा व साधना जैन ने भी विचार प्रकट किए।
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