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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बिना सभ्य समाज कहना गलत

Mon, 22 Aug 2016 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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sanghosti, jhansi news - फोटो : amar ujala, jhansi news
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झांसी। प्रगतिशील लेखक संघ उत्तर प्रदेश के राज्य सम्मेलन में भीष्म साहनी जन्म शताब्दी समारोह में मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने कहा कि आम आदमी तक पहुंचने की चुनौती लेखक के सामने है। जब तक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं होगी, तब तक हम सभ्य समाज कहलाने का हक नहीं रखते।
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बुंदेलखंड महाविद्यालय के स्वर्ण जयंती सभागार में भीष्म साहनी और आज का समय विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन अभिव्यक्ति की चुनौतियां विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि साहित्यकारों और संस्कृतकर्मियों को शब्दांबर के ढोंग से निकलकर समाज को समझने और समाज से सीधे जुड़ने का प्रयास करना चाहिए। लेकिन, जब तक विचार नहीं बदलते तब तक झंडे बदलने से समाज नहीं बदला जा सकता। 

महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति विभूति नारायण राय ने कहा कि भगत सिंह समाजवादी क्रांति के स्वप्नदृष्टा थे, जबकि, डा. भीमराव अंबेडकर भारत में जातिवाद को समाप्त कर आदमी और आदमी के बीच के अंतर को मिटाने के पक्षधर थे। राष्ट्रीय महासचिव प्रो. अली जावेद ने कहा कि जो प्रगतिशील नहीं, वह साहित्यकार नहीं। साहित्यकार समाज को आगे बढ़ाता है। सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. चौथीराम यादव ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि दलित महापुरुषों के नाम पर दुकान चलाने वाले राजनीतिक दल उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाने में समर्थ नहीं हैं। 
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इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश का मानना था कि आज मिथकों को इतिहास में बदलने की मुहिम चल रही है। जबकि, इतिहास वैज्ञानिक सर्वेक्षण के आधार पर लिखा जाता है। वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र राजन ने कहा कि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। संचालन प्रो. संतोष भदौरिया और आभार डा. संजय श्रीवास्तव ने व्यक्त किया।
उधर, समापन सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि समाज को बदलने का काम साहित्यकारों ने ही किया है। विशिष्ट अतिथि डा. विजय भारद्वाज, प्रो. श्याम कश्यप, डा. खगेंद्र बहादुर ने भी संबोधित किया। संयोजक डा. नवेंद्र कुमार सिंह रहे। सत्र का संचालन डा. मुहम्मद नईम और आभार डा. एस के राय ने व्यक्त किया। 

इससे पहले सुबह साहित्यकारों, रंगकर्मियों व संस्कृतकर्मियों ने सांस्कृतिक मार्च निकाला। इसके बाद उन्होंने चंद्रशेखर आजाद, भगवानदास माहौर, अहिल्याबाई और पं. जवाहर लाल नेहरू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान सांप्रदायिक सद्भाव और साझा संस्कृति के समर्थन में नारे लगाए। इस अवसर पर असरार गांधी, संध्या निवेदिता, डा. आनंद प्रकाश, प्रो. इकबाल हुसैन, जे एन पाठक, दिनेश बैस, अर्जुन सिंह चांद, बृजमोहन, मानवी गंगेले, पारसमणि अग्रवाल, शिरोमणि सिंह राजपूूत उपस्थित रहे।  

नई कार्यकारिणी का चुनाव
प्रगतिशील लेखक संघ की प्रदेश कार्यकारिणी का चुनाव किया गया, जिसमें प्रो. संतोष भदौरिया को अध्यक्ष, डा. संजय श्रीवास्तव को महासचिव और डा. मुहम्मद नईम को सचिव चुना गया। संरक्षक मंडल में प्रो. काशीनाथ सिंह, विभूति नारायण राय, प्रो. चौथीराम यादव, नरेश सक्सेना, हरीचरन प्रकाश, प्रो. अकील रिजवी  समेत अन्य सदस्यों को चुना गया। सत्र का संचालन डा. जयप्रकाश धूमकेतु ने किया। 
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