झांसी। मजदूरों को रोजगार मुहैया कराने के लिए चलाई जा रही मनरेगा, अफसरों के घपले के ठिकाना बनती जा रही है। मनरेगा की आड़ में इस बार बामौर ब्लॉक में घपला उजागर हुआ है। जांच में सामने आया कि बिना काम कराए करीब 9.26 लाख रुपये हड़प लिए गए। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब अफसर रिकवरी के बहाने दोषियों को बचाने की कोशिश में जुटे हैं।
बामौर ब्लॉक के ग्राम पंचायत करगुवां खुर्द में मनरेगा से पक्का नाला निर्माण (वकील तिवारी से भगवानदास तक), पुलिया निर्माण बेलिया संपर्क मार्ग पर (रतन के खेत के पास), आरसी पुलिया निर्माण (गुल्ली जयराम के खेत के पास) और एपेक्स निर्माण (बैजनाथ के मकान से गजराज के मकान तक) कराए गए जबकि ग्रामीणों का कहना है मौके पर यह कार्य मनरेगा से नहीं हुए। ग्रामीणों की शिकायत पर 15 जनवरी से खंड विकास अधिकारी ने जांच शुरू की। पिछले हफ्ते उन्होंने यह जांच पूरी करके रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। जांच में मालूम चला वकील तिवारी से भगवानदास के घर के बीच का पक्का नाला निर्माण पिछली पंचवर्षीय में हो चुका।
मैटीरियल एवं मजदूरी का भुगतान भी कर दिया गया। जांच टीम को वहां नया निर्माण नहीं मिला जबकि कुल 318200 का भुगतान कर दिया गया। जांच अधिकारियों ने इसे गबन ठहराते हुए तकनीकी सहायक अनंत देव शर्मा, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी विकास वर्मा एवं ग्राम प्रधान से पूरी रकम वसूल करने की संस्तुति की। इसी तरह पुलिया निर्माण भी पिछले पंचवर्षीय में हो चुका लेकिन इसे भी मनरेगा के जरिए नया दिखाकर 209550 रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसी तरह आरसी पुलिया का निर्माण आज तक मौके पर नहीं हुआ जबकि मैटीरियल एवं मजदूरी के लिए 208154 रुपये का भुगतान कर दिया गया। जांच टीम ने इसे भी गबन करार देते हुए उक्त आरोपियों से वसूली की संस्तुति की। इसी तरह एपेक्स निर्माण भी मौके पर नहीं हुआ लेकिन, इसके एवज में भी 149260 का भुगतान कर दिया गया। बकरी आश्रय स्थल के नाम पर दिए गए पैसे भी अफसर गटक गए। इसके लिए 40920 रुपये का फर्जी भुगतान करके पैसा निकाल लिया गया। जांच टीम ने सिर्फ इसी एक गांव में कुल 9.26 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा पकड़ा है। जांच रिपोर्ट में सभी से वसूली की संस्तुति की गई है।
सामने आ रहे बड़े-बड़े घपले, जिम्मेदार अफसर खामोश
मनरेगा के कार्यों में लगातार घपले सामने आ रहे हैं लेकिन, आरोपियों के साथ ही मनरेगा सेल के जिम्मेदारों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही। बता दें, सीधा रोजगार से जुड़ा होने केनाते शासन स्तर पर इसकी खास निगरानी रखी जाती है। स्थानीय स्तर पर सीडीओ को भी निगरानी करनी होती है। सिर्फ मनरेगा कार्य के लिए उपायुक्त स्तर का अधिकारी भी तैनात रहता है लेकिन, इसके बावजूद बड़े-बड़े घपले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले माह बामौर ब्लॉक में ही बकरी आश्रय स्थल के नाम पर करीब 18 लाख रुपये का घपला उजागर हुआ लेकिन, कार्रवाई के बजाए निगरानी में लगे आला अफसरों तक ने इस पूरे मामले में लीपापोती शुरू कर दी। गबन साबित हुई कई मामलों में आज तक किसी भी जिम्मेदार के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं कराई जा सकी। इन सबके चलते आला अफसरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ रही है।