- लखेरी नदी तट पर स्थित इसकिल पठ्ठा आश्रम में विराजमान हैं शिवलिंग
गरौठा। लखेरी नदी तट पर स्थित इसकिल पठ्ठा आश्रम के समीप विराजमान सात शिवलिंग के दर्शनों के लिए महाशिवरात्रि पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है। घने जंगलों में लखेरी नदी के किनारे विराजमान भगवान शिव की सात ज्यार्तिलिंग हैं। मान्यता है कि यहां पहुंचने वाले भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। हालांकि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से इस क्षेत्र का जीर्णेाद्धार नहीं हो पा रहा है। इसकिल पठ्ठा आश्रम पर महंत केशवदास यहां वर्षों से पूजा करते आ रहे हैं। घने जंगलों में लखेरी नदी के किनारे विराजमान होने की वजह से यहां मकर संक्रांति एवं शिवरात्रि पर्व पर भीड़ उमड़ती है। संवाद
नागेश्वर पर्वत की गुफा में भी होते हैं शिवलिंग के दर्शन
गरौठा। महर्षि विश्वामित्र की तपस्थली तपोभूमि झारखंड धाम में स्थित श्री नागेश्वर पर्वत के उच्च शिखर पर गुफा में प्राकृतिक शिवलिंग दर्शनीय है। यहां शिवरात्रि के अलावा अमावस्या, पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा के लिए करीबन 1500 मीटर की कठिन चढ़ाई कर पर्वत के शिखर पर पहुंचते हैं। यहां ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक कर अपनी मनोकामना गुफा की चट्टानों या वृक्षों पर लिख देता है उसकी मनौती भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं। तपोभूमि परिक्षेत्र में स्थित इस पावन नागेश्वर पर्वत की सवा कोसी परिक्रमा भी बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों द्वारा की जाती है। परिक्रमा मार्ग सुगम बनाने में प्रयासरत कमलेश लंबरदार के अनुसार इस पावन पर्वत की परिक्रमा करने से एक अजीब आनंद की अनुभूति होती है। नागेश्वर सेवा समिति द्वारा हर अमावस्या तथा अन्य धार्मिक उत्सवों पर भंडारा व प्रसाद की व्यवस्था की जाती है।