ईवीएम का बटन दबाने पर आपका वोट सही प्रत्याशी को मिला अथवा नहीं, यह आपको वीवीपैट मशीन से पता चल जाएगा। यदि वोट किसी पार्टी के प्रत्याशी को डाला और किसी दूसरे प्रत्याशी के नाम की पर्ची निकली तो आप दावा कर सकते हैं। इसकी जांच होगी, यदि जांच सही पाई जाती है तो आपको एक और वोट देने का मौका मिलेगा। साथ ही ईवीएम और वीवीपैट मशीन भी बदली जाएगी।
झांसी विधानसभा में अबकी बार वीवीपैट (वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल) मशीन का भी प्रयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से मतदाता देख सकेंगे कि उन्होंने किस उम्मीदवार को वोट दिया है। यह व्यवस्था पहली बार की जा रही है। प्रिंटर से निकलने वाली पर्ची सिर्फ सात सेकेंड के लिए ही मतदाता देख सकेंगे कि किसे वोट दिया है। इसके बाद पर्ची बाक्स में गिर जाएगी। यदि मतदाता को लगता है कि उसने जिसे वोट दिया था, उस प्रत्याशी को वोट नहीं पड़ा है, तो वह इसका दावा कर सकेगा। लेकिन, दावा करने से पहले एक घोषणा पत्र भरना होगा।
यदि शिकायत सही पाई जाती है तो पीठासीन मतदान रोक देंगे और ईवीएम, वीवीपैट व कंट्रोल यूनिट मशीन बदलवाई जाएगी। इसके बाद वोटर को दूसरी मशीन में वोट डालने का मौका मिलेगा। प्रत्येक पोलिंग बूथ पर करीब 1,500 मतदाता हैं। इसलिए वीवीपैट मशीन में ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि उतनी ही पर्चियों का प्रिंट निकले।
अदालत में सबूत का काम क रेगी पर्ची
प्रत्येक वीवीपैट मशीन सही काम कर रही है या नहीं, इसके लिए सभी मशीन से मतदान से पहले मॉक पोल कराया जाएगा। यह मॉक पोल पचास वोटों का होगा। इन सभी वोटों की पर्चीं लिफाफे में पैक कर सुरक्षित रखी जाएंगी, ताकि मतगणना को लेकर यदि सवाल उठते हैं व कोई अदालत में याचिका दाखिल करता है तो सबूत के तौर पर यह पर्चियां इस्तेमाल की जा