छोटे किसानों को रोजी-रोटी चलाने में अब मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा। भरारी कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को कम भूमि में अलग-अलग यूनिट बनाकर उपज और आय के स्रोत बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण देगा। इसके लिए विज्ञान केंद्र पर प्रदर्शन इकाईयां लगाई जाएंगी। प्रस्ताव पर शासन ने मुहर लगा दी है। इनके जरिए किसानों को केंचुआ खाद, नाडेप कंपोस्ट बनाने और सब्जियां, अनाज बोने के साथ ही बकरी पालन की विधियां बताई जाएंगी।
कृषि विज्ञान केंद्र ने प्रदर्शन इकाइयां लगाने के लिए करीब एक साल पहले शासन को पत्र लिखा था। इस प्रस्ताव पर शासन की मुहर लग गई है। अब विज्ञान केंद्र को 15 लाख रुपये का बजट मिलेगा। इस राशि से केंद्र परिसर में अलग-अलग यूनिट बनाई जाएंगी। इसका प्रमुख उद्देश्य कम भूमि वाले किसानों को एक के बजाए कई प्रकार की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना है। ऐसा करने से किसान खुद के खाने-पीने की व्यवस्था के साथ-साथ आय का स्त्रोत भी बढ़ा सकें गे। केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया कि इस योजना से मुख्यत: एक हेक्टेयर से कम भूमि के किसानों को फायदा पहुंचाना है। इसके जरिए बताया जाएगा कि कैसे कम जमीन पर केंचुआ खाद, गोबर, कचरा एकत्र कर जैविक खाद बनाने के लिए नाडेप कंपोस्ट तैयार करने के साथ-साथ एकीकृत फसल प्रणाली, सब्जियां, अनाज, उद्यान लगाने और बकरीपालन के तरीके बताए जाएंगे। किसानों को यह भी बताया जाएगा कि कम पानी में सिंचाई कैसे की जा सकती है। बजट जारी होते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।