झांसी। पापा चौथी बिटिया से आप क्यों डर गए। मेरे जन्म लेते ही आप इतना नाराज हो गए कि दुनिया से ही चले गए। अब मैं किसकी उंगली पकड़कर चलना सीखूंगी। मुझे कौन खिलौने लाएगा। पापा जिस तरह से मेरी तीन बहनें थीं उसी तरह मैं भी रह लेती। लेकिन आपने तो मुझे देखना तक मुनासिब नहीं समझा। मां की तबीयत भी खराब है। वह तो फूट-फूटकर रो रही है। सब मुझे ही कोस रहे हैं। किसी के चेहरे पर खुशी नहीं दिख रही।...अगर यह नवजात बोल पाती तो शायद यही कहती।
गांव धुरवारा निवासी विनोद अहिरवार की पत्नी ने बृहस्पतिवार को मड़ावरा के अस्पताल में एक फूल सी बेटी को जन्म दिया। नर्स ने अस्पताल में डिलीवरी रूम के बाहर बैठे विनोद के पिता और परिवार के दूसरे लोगों को कन्या के जन्म की जानकारी दी थी। शायद इन्हें बेटे की उम्मीद थी लिहाजा सभी लोग उदास मन लेकर बाहर आ गए। पिता ने फोन करके विनोद को भी जानकारी दी। परिवार वालों का कहना है कि विनोद को जैसे ही पता चला कि बेटी हुई तो उसने घर में रखा जहर खा लिया और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। अस्पताल में भर्ती पत्नी तक खबर पहुंची तो वह भी दहाड़े मारकर रोने लगी। उसकी हालत बिगड़ गई थी। परिवार में कोहराम था। बताया जाता है कि अधिकांश ने नवजात को देखा तक नहीं। अस्पताल से लेकर धुरवारा गांव तक इस घटना की चर्चा रही। किसी ने कहा कि जैसी तीन बेटी पल रही हैं वैसे ही चौथी भी पल जाती। किसी ने कहा कि तमाम लोग बच्चों के लिए तरस रहे हैं उन्हें दे देता।
विनोद ने घर वालों से कहा था कि इस बार तो बेटा ही होगा
झांसी। परिवार के लोगों की अगर मानें तो विनोद को उम्मीद थी कि इस बार बेटा ही होगा। बेटे की उम्मीद में ही चौथी बेटी हो गई। घर वालों का कहना है कि दो दिन से वह सबसे कह रहा था कि बेटा आने वाला है। लेकिन बेटी ने जन्म लिया।