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उमा भारती के बाद भाजपा का प्रत्याशी कौन?

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uma bharti - फोटो : amarujala
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झांसी - ललितपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती चुनाव न लड़ने का एलान कर चुकी हैं। उमा के बाद इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी किसे प्रत्याशी बनाएगी? यह प्रश्न बना हुआ है। भाजपा की ओर से अभी इस बारे में कुछ नहीं कहा जा रहा है। जबकि, लोगों के बीच प्रत्याशी को लेकर कयासबाजी जोरों पर जारी है।
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भारतीय जनता पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में झांसी - ललितपुर संसदीय क्षेत्र से पार्टी की कद्दावर नेता उमा भारती को प्रत्याशी बनाया था। उन्होंने रिकार्ड 5.75 लाख मत हासिल कर जीत हासिल की थी। उमा ने सपा के डा. चंद्रपाल सिंह यादव को 1.90 लाख वोटों के भारी अंतर से हराया था। मोदी सरकार बनते ही उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया गया था। लेकिन, एक साल पहले उन्होंने चुनावी राजनीति से दूर हटने का एलान कर दिया था। इसके बाद भी उन्होंने अपना ये फैसला कई बार दोहराया। रविवार को झांसी में आयोजित जनसभा में उमा ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सामने ‘ये मेरी आखिरी जनसभा है’ कहकर अपने फैसले पर अडिग रहने का संकेत दिया। उन्होंने पिछली जीत के लिए लोगों का आभार भी जताया।  
ऐसे में इस साल होने वाले देश के आम चुनाव में भाजपा इस सीट से किसे प्रत्याशी बनाएगी? अभी इस मसले पर पार्टी चुप्पी साधे हुए है। पार्टी के नेता खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। जनता के बीच उमा के चुनाव न लड़ने का संदेश पहुंचने से अगले प्रत्याशी को लेकर चर्चाएं जोरों पर जारी हैं।
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चर्चाओं में झांसी - ललितपुर क्षेत्र के विधायक रवि शर्मा, राजीव सिंह पारीछा, जवाहर लाल राजपूत व रामरतन कुशवाहा के नाम तैर रहे हैं। इसके अलावा परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और दतिया से विधायक नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री रवींद्र शुक्ल, डा. विजय खैरा, डा. आशीष अग्निहोत्री के भी इस सीट से चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं।

उमा भारती चुनाव लड़ने से भले ही मना कर चुकी हों, परंतु पार्टी कोशिश करेगी कि वे चुनाव लड़ें। उन्होंने क्षेत्र के लिए बहुत कुछ किया है। जनता का उनसे लगाव है। उनके न मानने की स्थिति नये प्रत्याशी को मैदान में उतारा जाएगा। प्रत्याशी का चयन केंद्रीय कमेटी करेगी। प्रत्याशी की छवि और जनता के बीच में उसकी लोकप्रियता को देखकर फैसला लिया जाएगा। प्रत्याशी कोई भी हो जीत भाजपा की ही होगी।
- संजीव श्रृंगीऋषि, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष - भाजपा

डेढ़ दशक बाद हुई थी भाजपा की वापसी
झांसी-ललितपुर संसदीय सीट पर भारतीय जनता पार्टी के राजेंद्र अग्निहोत्री ने 1989, 1991, 1996 और 1998 के लगातार चार लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज की थी। 1999 में ये सीट कांग्रेस के सुजान सिंह बुंदेला ने भाजपा से छीनी थी। अगला 2004 का चुनाव सपा के चंद्रपाल सिंह यादव ने जीता, तो इसके बाद 2009 में कांग्रेस के प्रदीप जैन सफल रहे थे। 2014 में भाजपा की उमा भारती ने ये सीट कांग्रेस से छीनकर एक बार फिर से पार्टी का परचम फहराया था।

गठबंधन की है चुनौती
भारतीय जनता पार्टी को इस लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसका अंदाजा 2014 के लोकसभा चुनाव के वोटों को देखकर लगाया जा सकता है। पिछले चुनाव में भाजपा को 5.75 लाख वोट मिले थे। जबकि, सपा और बसपा को मिले वोटों का योग भाजपा से अधिक 5.99 लाख रहा था।
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