अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। मुखिया नगर निवासी शीला करीब 18 घंटे घर से लापता रही। उसके बाद सुबह नौ बजे उसका शव गांव के बाहर बरामद हुआ। यह इन 18 घंटे कहां रही, यह गुत्थी पुलिस अभी तक सुलझा नहीं सकी। दोनों आरोपियों से प्रारंभिक छानबीन में भी पुलिस के हाथ अभी बहुत कुछ नहीं आया। पुलिस उनसे भी पूछताछ कर रही है।
जिस जगह शीला का शव मिला, वहां करीब दस फीट तक घसीटने के निशान मिले हैं। इसको देखकर अंदेशा जताया जा रहा कि हत्या करने के बाद उसके शव को घसीटकर खेत में बने गड्ढे में फेंका गया। आसपास टूटी हुई चूड़ियां पड़ी थीं। जगह-जगह खून भी बिखरा हुआ था। आशंका जताई जा रही कि दोपहर करीब तीन बजे जब शीला खेत में पहुंची थी, उसी दौरान हत्यारों ने उसे अगवा कर लिया। मंगलवार तक शीला जीवित रही। आसपास पड़े खून देखने से मालूम चल रहा कि तड़के ही शीला की हत्या करके उसके शव को वहां फेंककर हत्यारे निकल भागे। सुबह करीब नौ बजे उसका शव खेत में पड़ा मिला। पुलिस परिवार के अन्य लोगों से भी पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक छानबीन में पुलिस को मालूम चला कि गणेश रायकवार के सभी भाई तालाबपुरा मोहल्ले में रहते हैं। उसके छोटे भाई जगन की मौत हो गई लेकिन, उसकी पत्नी मीरा एवं उसके पुत्र बृजलाल से गणेश के परिवार की नहीं बनती। दोनों के बीच अक्सर ही विवाद होता है। कुछ दिन पहले जुताई के दौरान भी दोनों के बीच रास्ते की जमीन को लेकर विवाद हो गया था। गणेश का आरोप है कि उस दौरान ही बृजलाल ने पूरा परिवार मिटा डालने की धमकी दी थी हालांकि पुलिस अभी मामले की छानबीन कर रही है।
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शीला की तलाश में परिजनों के साथ जुटा रहा बृजलाल
शीला का पति गणेश रायकवार अपने भतीजे बृजलाल पर हत्या का आरोप लगा रहा है। पुलिस भी उसे हिरासत में लेकर पूछताछ में लेकर जुटी है लेकिन, ग्रामीणों ने बताया कि सोमवार शाम से शीला के लापता होने के बाद परिजन उसकी तलाश करने में जुटे थे। उनके साथ खुद बृजलाल भी चाची शीला को तलाशने में जुटा था। कई घंटे तक वह भी चाचा गणेश एवं अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर शीला की तलाश करता रहा। इसके बाद सुबह वह अपने घर चला गया। सुबह जब शीला का शव खेत में पड़ा मिला, तब बृललाल घर पर ही था। पुलिस ने उसे घर से ही हिरासत में ले लिया। पिता जगन की मौत के बाद बृजलाल ही परिवार का मुखिया था। जीविकोपार्जन के लिए वह एसी रिपेरिंग का काम करता था।
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पुलिस बल की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
शीला के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद देर-शाम उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। इस दौरान सुरक्षा के लिहाज से गांव में पुलिस बल भी तैनात रहा।