झांसी। पश्चिमी रेलवे कॉलोनी से अतिक्रमण हटने के बाद अब संबंधित क्षेत्रों के कार्य निरीक्षकों को चार्जशीट थमा दी गई है। उनसे चार्जशीट में पूछा गया है कि आखिर उन्होंने पहले अतिक्रमण हटाने के लिए मुहिम क्यों नहीं चलाई? अभी भी कई और क्षेत्रों में अतिक्रमण है, जिसको हटाने के लिए अभी कोई पहल नहीं की गई है।
पश्चिमी रेलवे क्षेत्र सैकड़ों हेक्टेयर जमीन में फैला हुआ है। यहां 2250 रेलवे क्वार्टर बने हैं। पिछले कई साल से रेलवे कॉलोनी से दीनदयाल नगर जाने वाले रास्ते, केंद्रीय विद्यालय नंबर तीन के पीछे, गौड़ बाबा मंदिर के सामने, नीम वाली माता मंदिर के पास, हाट के मैदान क्षेत्र में खाली पड़ी जमीन पर कई प्रभावशाली लोग गिट्टी, बालू, गुम्मे, गमले का कारोबार कर रहे हैं।
इस संबंध में कई बार रेल प्रशासन से शिकायत की गईं, मगर अतिक्रमण हटाने को लेकर पहल किसी ने नहीं की। पिछले माह डीआरएम एसके अग्रवाल ने इससे सख्ती से निपटने के लिए संबंधित अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। विगत 25 जुलाई से तीन अगस्त तक आरपीएफ के सहयोग से चलाए गए अभियान के दौरान दीनदयाल नगर, केंद्रीय विद्यालय तीन के पीछे व गौड़ बाबा मंदिर के पास का अतिक्रमण हटा दिया गया। जमीन पर दुबारा कब्जा न हो, इसके लिए कटीले तार लगाए गए हैं।
मगर, चार दिन पहले रेल प्रशासन ने उक्त क्षेत्र के वरिष्ठ खंड अभियंता आरके गुप्ता, खंड अभियंता आरएस सक्सेना व रसूल खान को चार्जशीट (एफएस 11) थमा दी। चार्जशीट में उनसे पूछा गया है कि अब से पहले उन्होंने अतिक्रमण हटाने की पहल क्यों नहीं की? वह अब तक क्या कर रहे थे? जवाब को लेकर अभियंता परेशान हैं।
‘रेलवे सभी अतिक्रमित क्षेत्रों को मुक्त कराने के लिए मुहिम चला रहा है। जिन क्षेत्रों से अतिक्रमण नहीं हटा है, वहां भी शीघ्र अभियान चलाया जाएगा।’
- गिरीश कंचन, पीआरओ
इन क्षेत्रों से अभी अतिक्रमण हटना बाकी
अभी भी नीम वाली माता मंदिर के पास, हाट के मैदान क्षेत्र में खाली पड़ी जमीन पर कई प्रभावशाली लोग गिट्टी, बालू, गुम्मे, गमले का कारोबार कर रहे हैं। इन क्षेत्रों से अभी अतिक्रमण नहीं हटाया गया है।
कई बार आरपीएफ को लिखे गए पत्र
अतिक्रमण हटाने को लेकर पहले भी कई बार आरपीएफ को पत्र लिए गए, मगर कार्रवाई नहीं की गई। दरअसल, कारोबार से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदार व अन्य परिचित आरपीएफ में तैनात हैं। इस कारण हर बार मामला दबता रहा।
चौदह साल से एक ही सीट पर
पश्चिमी रेलवे कॉलोनी में एक कार्य निरीक्षक पिछले चौदह साल से एक ही सीट पर कार्यरत हैं। चूंकि, यह कर्मचारी यूनियन नेता है, इस कारण उनके स्थानांतरण को लेकर कोई नीति काम नहीं कर रही है। इस भेदभाव से अन्य कर्मचारियों में मायूसी रहती है।