झांसी। महापौर के गोद लिए गए डड़ियापुरा स्वास्थ्य केंद्र में जबरदस्त पेयजल संकट है। यहां बूंद-बूंद की समस्या होने की वजह से स्टाफ को घर से पीने का पानी भरकर लाना पड़ता है। इसी जल संकट की वजह से यहां प्रसव कराने में भी दिक्कत आती है। ऐसे में प्रसूताओं को स्वास्थ्य कार्यकर्ता जिला अस्पताल लेकर जाते हैं।
32 हजार की आबादी के बीच डड़ियापुरा में स्वास्थ्य केंद्र सितंबर 2014 में खोला गया था। तब से ही ये केंद्र पेयजल संकट की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। पानी नहीं होने की वजह से यहां पर स्टाफ और मरीजों दोनों को दिक्कतें होती हैं। वहीं, जगह की भी समस्या है। इन वजहों के चलते यहां पर सामान्य प्रसव तक नहीं हो पाते हैं। ओपीडी में मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं जरूर दी जाती हैं। हाल ही में महापौर रामतीर्थ सिंघल ने इस केंद्र को गोद ले लिया है। हालांकि, मेयर के गोद लेने के बाद सात सालों में पहली बार यहां पर रंगरोगन का काम शुरू हो गया है। इससे बदसूरत दिखने वाले स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर बदलनी शुरू हो गई है। वहीं, यहां पर टिन शेड भी डलवाया गया है, इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को धूप से समस्या न हो।
कोविड में लगी एलटी, स्टाफ नर्स की ड्यूटी
डड़ियापुरा स्वास्थ्य केंद्र में फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, एआरओ, लैब टेक्नीशियन (एलटी), वार्ड ब्वाय, दो वार्ड आया, एक चौकीदार, चार एएनएम की तैनाती है। मौजूदा समय में कोविड में ड्यूटी लगी होने के कारण एलटी और स्टाफ नर्स यहां अपनी सेवाएं नहीं दे पा रही हैं। एलटी नहीं होने से यहां कई जांचें भी नहीं होती हैं। हालांकि, शुगर, बीपी, हीमोग्लोबिन, प्रेगनेंसी की जांच अन्य कर्मचारियों से कराई जा रही है। बाकी के लिए जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है।
एक डॉक्टर के भरोसे केंद्र, पीडियाट्रीशियन की जरूरत
स्वास्थ्य केंद्र की एमओआईसी पर ही इसका पूरा भार है। कोरोना के पहले तक यहां पर रोजाना सौ लोगों को वह ओपीडी में देखती थीं। वहीं, प्रसूताओं की जांच व स्वास्थ्य परीक्षण करती हैं। जरूरी दवाएं भी लिखती हैं। मगर प्रसव के बाद छोटे बच्चों को देखने के लिए यहां पर बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रीशियन) नहीं है। दो साल पहले तक यहां पीडियाट्रीशियन थे, मगर उनका तबादला हो गया है। वहीं, स्टाफ ने बताया कि कई बार यहां पर बुलाने पर समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंचती है। ऐसे में ऑटो करके प्रसूताओं को जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है।
डड़ियापुरा स्वास्थ्य केंद्र में पानी की समस्या की अब तक किसी ने जानकारी नहीं दी थी। रविवार को ही जल संस्थान के अधिकारियों से बात कर यहां पेयजल संकट दूर कराने का प्रयास कराया जाएगा। यदि पुरानी पाइप लाइन से समस्या दूर हो सकेगी तो डलवाएंगे। वरना बोरिंग भी करा सकते हैं। केंद्र में रंगरोगन समेत अन्य कार्य जारी हैं। जल्द तस्वीर बदलेगी। - रामतीर्थ सिंघल, महापौर।
स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी में कई मरीज रोजाना देखे जाते हैं। इसके अलावा टीकाकरण, आयुष्मान कार्ड बनना, प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा समेत विभिन्न योजनाओं का लाभ मरीजों को मिलता है। जांचें भी की जाती हैं। अब मूलभूत सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं। रंगरोगन हो गया है। इसके अलावा टिन शेड डलने से लोगों को धूप से भी समस्या नहीं हो रही। - डॉ. प्रज्ञा श्रीवास्तव, एमओआईसी।