जामनी नदी उफनाने से कई सड़कों पर आवागमन ठप
डोंगरा (ललितपुर)। लगातार हो रही बरसात से जामनी बांध का जलस्तर बढ़ गया है, जामनी नदी उफान पर है। इस दौरान जिले के तीन अलग-अलग मार्गों पर नदी के रिपटों पर पानी होने के कारण आवागमन पूरी तरह से ठप है। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुईं हैं। पुलिस भी तैनात की गई है, जिससे लोग पानी के बीच से रिपटे पार न कर सकें।
जिले में लगातार हो रही बारिश व मध्यप्रदेश से आने वाले पानी के कारण महरौनी-बानपुर मार्ग केपुतली घाट के रिपटे पर पानी है, इसी तरह महरौनी ललितपुर मार्ग पर छपरट के रिपटे पर व ललितपुर-मड़ावरा और महरौनी मार्ग पर कुजान पुल ङूब गया है। ललितपुर- मड़ावरा- महरौनी एवं कुजान के पुल पर दस फीट तक पानी आ जाने से यातायात ठप है। वाहनों की कतारें पानी उतरने का इंतजार कर रही हैं। इसमें ट्रकों की संख्या सर्वाधिक है। सुरक्षा को देखते हुए छपरट पुल पर पुलिस तैनात कर दी गई है।
महरौनी- नाराहट यातायात पूरी तरह से बंद है। निजी वाहन चालक पचास किलोमीटर जामनी बांध सड़क का चक्कर लगाकर मंजिल पर पहुंच रहे हैं। बस, ट्रक, पिकअप, टैक्सी आदि वाहन नदियां का पानी उतरने का इंतजार कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के सागर जिले में हो रही बरसात से पांडव वन नदी उफान पर है, जिसका पानी जामनी बांध में पहुंच रहा है। बांध का जलस्तर देखकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने सोमवार को रात नौ बजे बांध के दो गेट दो- दो फीट एवं चार गेट एक- एक फीट खोल दिए हैं। 17182 क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है।
मध्यप्रदेश में जोरदार बरसात होने से बांध का जलस्तर 403.25 मीटर रखना है। अगर इससे अधिक पानी बढता है तो उसकी निकासी की जाएगी। अब तक 42 मिलीमीटर वर्षा हुई है। चार दिन से लगातार गेट खोले जा रहे हैं। पानी की जितनी निकासी की जा रही है, उतना बांध का जलस्तर बढ़ रहा है। पानी बढ़ता देख सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी जामनी बांध पर अपना डेरा जमाए हुए हैं। बांध पर उपस्थित कर्मचारी सतर्कतापूर्वक बांध के जलस्तर पर निगरानी रखे हुए हैं। तार बाबू सुरेश कुमार ने बताया कि सोमवार की रात नौ बजे बांध का जलस्तर अचानक बढ़ा था। पानी को देखते हुए पूरे गेट खोल दिए गए थे।
सोमवार की रात को जामनी बांध का जलस्तर अचानक बढ़ गया था, जिससे पूरे गेट खोल दिए गए थे। पानी को नियंत्रित कर लिया गया है। बांध के पीछे वाले गांवों में सूचना दे दी गई। वैसे बाढ़ का किसी प्रकार का खतरा नहीं है। नदियां जरूर उफान पर हैं।
- राजेंद्र कुमार, सहायक अभियंता (प्रथम)