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दूध के नाम पर बेच रहे हैं पानी

Wed, 05 Jul 2017 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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milk - फोटो : demo
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झांसी।
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दूध में बड़े पैमाने पर मिलावट के सबूत मिले हैं। यह गोरखधंधा अरसे से चल रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों से दूध के 114 नमूने इकट्ठा कर उनकी जांच की गई। इसमें 68 में पानी की मिलावट पाई गई। कई में तो 60 फीसदी तक पानी मिला। दूध के ये नमूने घरों और दुकानों से लिए गए। रसबहार कालोनी, आवास विकास और वीरांगना नगर में पानी की मिलावट की मात्रा ज्यादा निकली। खास बात यह कि वीआईवी मोहल्ले जैसे, आफीसर कालोनी, पुलिस लाइन, सर्किट हाउस और नंदनपुरा क्षेत्र में मिलावट कम पाई गई।
दूध की शुद्धता जांचने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को शासन ने ई- मैट मोबाइल वैन उपलब्ध कराई है। इसके शहर के विभिन्न इलाकों में घूम- घूम कर घरों और मिठाई की दुकानों में दूध की जांच की गई। ई- मेट मशीन में दूध रखने पर मशीन दो मिनट में दूध में मौजूद पानी की मात्रा, फैट, ठोस पदार्थों की मिलावट और गाढ़ापन पता लग जाता है। इस मशीन के जरिए नंदनपुरा, सरयू विहार कालोनी, आफीसर्स हॉस्टल, रस बहार कालोनी, आवास विकास कालोनी, शिवाजी नगर, पुलिस कालोनी, वीरांगना नगर और पिछोर समेत अन्य मुहल्लों में दूध की जांच की गई। रसबहार कालोनी, आवास विकास और वीरांगना नगर में दूध में पानी की मिलावट 40 से 50 प्रतिशत तक पाई गई। जबकि आफीसर कालोनी, पुलिस लाइन, सर्किट हाउस और नंदनपुरा क्षेत्र में दूध में पानी की मिलावट 20 से 30 फीसदी मिली। शायद दूधियों को डर है कि यहां गड़बड़ी की तो नप सकते हैं।
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शहर में दूध के दाम 48 से 52 रुपये प्रति लीटर हैं। लेकिन कई दूधिये 30 से 40 रुपये प्रति लीटर की दर से दूध दुकानों में सप्लाई करते और घरों तक पहुंचाते हैं। जाहिर है कि इतनी कम कीमत पर शुद्ध दूध मिलना मुश्किल है। इससे पता लगता है कि इसमें पानी मिलाकर मुनाफा कमाया जा रहा है।

इनसेट
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हानिकारक तत्व नहीं मिले
दूध में सिर्फ पानी की मिलावट पाई गई। कोई हानिकारक तत्व नहीं मिले। हां, यदि दूषित पानी मिलाया गया तो बीमारियां घेर सकती हैं।

ऐसे करते हैं मिलावट
दूध में मिलावट कई तरह से की जा रही है। एक तो दूध 24 घंटे से अधिक समय तक फटे न, इसके लिए सोडा मिलाया जाता है। गाढ़ा करने के लिए आरारोट मिलाया जाता है। खड़िया मिट्टी भी दूध को गाढ़ा करने में इस्तेमाल की जाती है। लेकिन इस तरह की कोई मिलावट नहीं मिली।

मावा में मिलावट भी जांचें
मिलावटी मावा की जांच की जा सकती है। मावा में थोड़ा सा बीटाडीन डालिये। यदि मिलावट है तो मावा का रंग हल्का नीला हो जाएगा।

ऐसे करें दूध की जांच
-दूध की जांच के लिए लेक्टोमीटर उपकरण बाजार में उपलब्ध है। थर्मामीटर की तरह का यह उपकरण दूध में डालने से तुरंत इसमें मौजूद फैट की मात्रा बता देता है। यदि भैंस का दूध है और रीडिंग 27 के ऊपर आ रही है तो दूध शुद्ध है। गाय के दूध में रीडिंग 23 के ऊपर आती है तो दूध शुद्ध है, वरना पानी मिलावट है।
- बीटाडीन लोशन से भी दूध में मिलावट की जांच की जा सकती है। इसके लिए कांच के गिलास में दूध भरकर ड्रापर से बीटाडीन लोशन की दो बूंद डालने पर दूध का रंग भूरा हो जाए तो कोई मिलावट नहीं है। यदि दूध का रंग नीला हो जाता है तो इसमें मिलावट है।

लग रही हर महीने चपत
मान लीजिए एक घर में प्रतिदिन एक लीटर दूध 50 रुपये में आता है। यदि इसमें तीस प्रतिशत पानी की मिलावट है तो प्रतिदिन 15 रुपये की चपत उपभोक्ता को लगाई जा रही है। इस तरह एक उपभोक्ता हर महीने 450 रुपये की चपत लगाई जा रही है। शहर में डेढ़ लाख से अधिक परिवार रहते हैं। यदि चपत का आंकड़ा जोड़ा जाए तो लाखों रुपये का नुकसान हर महीने दूध उपभोक्ताओं को हो रहा है।

हो सकती है सजा और जुर्माना
दूध में पानी की मिलावट पाए जाने पर 500 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि कोई घातक रसायन की मिलावट मिली तो छह महीने से तीन साल तक की सजा हो सकती है।

दूध में मिलावट नुकसानदेह
बरसात के दिनों में दूध में पानी की मिलावट भी नुकसान पहुंचा सकती है। क्योंकि, प्रदूषित पानी से दस्त होने की संभावना रहती है। खासकर छोटे बच्चों को कई बार दूध पीने के बाद उल्टी होने की शिकायत हो जाती है। इसके अलावा कुछ दुकानदार बर्तन को डिटर्जेंट पाउडर से साफ करने के  बाद उसे कपड़े से पोंछते नहीं हैं और गीले बर्तन में ही दूध भर देते हैं। इससे डिटर्जेंट का असर आ जाता है। यूरिया मिले दूध के असर से गुर्दों में खराबी होने की संभावना रहती है।
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- डा. आलोक रावत
चिकित्सक


कोट.....
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शीघ्र अभियान चलेगा
शासन से दो दिन के लिए ही ई- मेट मशीन मिली थी। अब मशीन ललितपुर चली गई है। दूध में पानी की मिलावट ज्यादा मिली है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि वे कम रेट पर दूध खरीद रहे हैं, क्योंकि उन्हें भरोसा ही नहीं रहता कि दूध शुद्ध होगा। इसलिए दूधियों (विक्रेताओं) से कोई शिकायत नहीं है। यदि किसी ने शिकायत की तो कार्रवाई की जाएगी। शीघ्र ही फिर बड़े पैमाने पर अभियान चलेगा और मिलावट करने वाले पकड़े जाएंगे।
- राजेश द्विवेदी
अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग
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