झांसी। महानगर के मोहल्ला दरीगरान, अलीगोल और सरांय के हजारों बाशिंदे पिछले तीस साल से पानी की समस्या के समाधान के लिए नेताओं और अफसरों की चौखट के चक्कर लगाकर थक गए। नेताओं ने आश्वासन तो खूब दिया, लेकिन समस्या का समाधान किसी ने नहीं किया। यही कारण है कि आज भी इस क्षेत्र के निवासियों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। अब लोगों को माननीय की बातों पर यकीन नहीं है और उनका नेताओं से मोहभंग हो गया है। वह इतने आक्रोशित हैं कि अब वोट मांगने आने पर नेताजी को मोहल्ले से दौड़ा लेंगे।
तीनों मोहल्ले बहुत पुराने हैं। यहां के निवासियों ने सियासत में कई उतार- चढ़ाव देखे हैं। यहां के निवासियों को करीब 1990 से गर्मियों में पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। करीब बीस हजार लोगों की आबादी परेशान है। क्योंकि कुछ क्षेत्रों में पानी की पाइपलाइन है और कुछ क्षेत्रों में नहीं है। जहां पर पाइपलाइन है, वहां के निवासी भी नलों में पानी नहीं आने के कारण परेशान रहते हैं। परेशानी तब और बढ़ जाती है, जब बिना पानी के उपयोग के ही लोगों को पानी का बिल जमा करना पड़ता है। नाराज लोग बिल जमा नहीं करते हैं। यही कारण है कि किसी का बिल बीस हजार तो किसी का चालीस हजार रुपये हो गया है और उन्हाेंने जमा नहीं किया। आसपास लगे हैंडपंपों का जलस्तर नीचे चला जाने के कारण पानी नहीं आता है। घरों में बोरिंग है, लेकिन इसके उसमें भी पानी नहीं है। इस कारण यहां के निवासी टैंकर पर निर्भर हैं।
दूसरा विकल्प ऋषिकुंज स्कूल है। स्कूल में लगा हैंडपंप भरपूर पानी दे रहा है। इस हैंडपंप पर आने वाले लोगों को पर्याप्त पानी मिल जाता है। यदि किसी के यहां कोई आयोजन होता है तो उसे पांच सौ रुपये खर्च कर प्राइवेट टैंकर बुलवाना पड़ता है। यहां पर एक और पाइपलाइन डाली गई है, जिससे जवाहर पब्लिक स्कूल तक पानी आता है। सिजरया कॉलोनी क्षेत्र में अब तक पाइपलाइन ही नहीं डली है। इस कारण पूरा क्षेत्र पानी के टैंकर पर निर्भर है, लेकिन जहां संकरी गलियां है वहां पर टैंकर की भी सुविधा नहीं है।
सभी जनप्रतिनिधि एक ही दल के फिर भी समस्या
राजनीति में इससे बेहतर अवसर शायद ही दोबारा मिलेगा, क्योंकि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर सांसद, विधायक, महापौर और वार्ड पार्षद तक एक ही दल के हैं। इसके बाद भी मोहल्ले वालों की पानी की समस्या जस की तस बनी हुई है।
पानी के लिए टैंकर का इंतजार करना पड़ता है, क्योंकि बोरिंग सूख गई है और हैंडपंप खराब पड़े हैं। किसी में भी पानी नहीं है। यदि टैंकर से पानी नहीं मिला तो एक किलोमीटर दूर से भरना पड़ता है। - रवि सोनी
नलाें में पानी नहीं आता है, केवल बिल आता है। इस कारण कोई बिल जमा नहीं करता है। बिल देने का कोई मतलब भी नहीं है। क्योंकि, जब प्रशासन पानी नहीं दे पा रहा है तो बिल किस मुंह से मांग रहा है। - ऋतिक
झांसी को स्मार्ट सिटी कहकर नेता अपनी पीठ थपथपाते हैं, लेकिन असलियत में ऐसा नहीं है। जिस शहर में लोगों को पानी के लिए इतना परेशान होना पड़े, उसे स्मार्ट सिटी कहने में भी हमें शर्म आती है। - गोलू
खूब भरोसा किया, लेकिन अब नेताओं से मोह भंग हो गया है। कई बार अधिकारियों के कार्यालयों पर जाकर धरना- प्रदर्शन किया। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। - रंजीत सोनी, महानगर कोषाध्यक्ष भाजपा
जिलाधिकारी कार्यालय पर मटके तोड़े, खूब प्रदर्शन किया। लेकिन, न तो अधिकारियों और न ही नेताओं ने इस ओर ध्यान दिया। पार्षद के चुनाव में सभी ने आश्वासन दिया, लेकिन किया कुछ नहीं। - मुन्नी देवी
तीस साल हो गए, लेकिन समस्या का किसी ने समाधान नहीं किया। किसी घर में पानी नहीं आता है। टैंकरों के भरोसे हैं। जब टैंकर नहीं आता है, एक किलोमीटर दूर ऋषिकुंज स्कूल जाना पड़ता है। - मनोहर साहू
राई का ताजिया के पास वाल्व लगा है, जिसे खोलकर पानी की आपूर्ति की जाती है। लेकिन वाल्व पूरा नहीं खोला जाता है। इस कारण मोहल्ला दरीगरान, अलीगोल और सरांय क्षेत्र में पानी नहीं आता है। यदि वाल्व सही तरीके से खुले तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो जाएगा। - अनीस
यदि ऋषि कुंज स्कूल में लगे हैंडपंप को ट्यूबवेल में बदल दिया जाए और पानी की सप्लाई ट्यूबवेल से कर दी जाए तो मोहल्ले की पानी की समस्या समाप्त हो जाएगी। इस सुझाव पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। परषोत्तम