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Jhansi News: वैगन मरम्मत कारखाना ने शुरू की डिटेचेबल ऊपरी बॉडी प्रणाली विकसित

Sat, 08 Aug 2026 02:18 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
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झांसी। वैगन मरम्मत कारखाना ने रेलवे माल वैगनों के लिए अभिनव नवाचार विकसित किया है, जो विशेष रूप से ओपन माल वैगनों की संरचना से संबंधित है। इस नवाचार के तहत एक वियोज्य (डिटेचेबल) ऊपरी बॉडी विकसित की गई है, जिसे विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए लॉकिंग एवं गाइडिंग तंत्र की सहायता से वैगन के अंडरफ्रेम से अलग किया जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे पुनः आसानी से जोड़ा जा सकता है। इससे वैगनों के मरम्मत के लिए रुकने (डिटेंशन) का समय कम हो जाता है।
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पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान में भारतीय रेलवे के माल वैगनों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनकी बॉडी स्थायी रूप से अंडरफ्रेम से वेल्डेड रहती है। ऐसे में जब बड़ी मरम्मत की आवश्यकता होती है, तब पूरे वैगन को परिचालन से हटाकर मरम्मत कारखाना भेजना पड़ता है। जबकि अधिकांश मामलों में वैगन का अंडरफ्रेम संरचनात्मक रूप से पूरी तरह सुरक्षित एवं उपयोग योग्य रहता है, फिर भी बॉडी के उससे स्थायी रूप से जुड़े होने के कारण उसका स्वतंत्र रूप से उपयोग संभव नहीं हो पाता। इसी प्रकार, दुर्घटना की स्थिति में क्षतिग्रस्त वैगनों को हटाने के लिए
संपूर्ण वैगन को क्रेन अथवा अन्य दुर्घटना बहाली उपकरणों की सहायता से हटाना पड़ता है, जिससे रेल मार्ग लंबे समय तक अवरुद्ध रहता है और रेल यातायात प्रभावित होता है। भारी बॉडी मरम्मत वाले माल वैगनों का औसत मरम्मत चक्र लगभग 6 दिन का होता है। जिससे वैगनों की उपलब्धता कम हो जाती है तथा माल परिवहन से होने वाली संभावित राजस्व प्राप्ति भी प्रभावित होती है। जबकि कारखाना
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द्वारा विकसित नवाचार के तहत ओपन माल वैगन पूर्ण रूप से वियोज्य (डिटेचेबल) ऊपरी बॉडी प्रणाली विकसित की गई है। इससे साइडवॉल, एंडवॉल, फ्लोर असेंबली को विशेष छह लॉकिंग तंत्रों के जरिए स्थापित किया जाता है। जब भी वैगन की बॉडी में व्यापक मरम्मत की आवश्यकता होती है, लॉकिंग तंत्र को खोलकर क्रेन की सहायता से पूरी ऊपरी बॉडी को अंडरफ्रेम से अलग कर लिया जाता है। अंडरफ्रेम को बॉडी की मरम्मत पूर्ण होने की प्रतीक्षा किए बिना तुरंत पुनः परिचालन में लाया जा सकता है, जिससे वैगनों की उपलब्धता बढ़ती है तथा मरम्मत में लगने वाला समय कम हो जाता है।


680 में 255 वैगन प्रतिदिन बॉडी मरम्मत के आते हैं

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पीआरओ ने बताया कि एक माल वैगन परिचालन में रहते हुए प्रतिदिन करीब 12,600 का राजस्व अर्जित करता है। वर्तमान में भारतीय रेलवे में प्रतिदिन लगभग 680 माल वैगनों को नियमित अनुरक्षण की आवश्यकता के कारण ''''सिक'''' घोषित कर कारखानों में भेजा जाता है। इनमें से लगभग 255 वैगन ऐसे होते हैं, जिनमें केवल बॉडी की मरम्मत की आवश्यकता होती है। डिटेचेबल वैगन बॉडी प्रणाली लागू होने पर पूरे वैगन को कारखाना भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल ऊपरी बॉडी को मरम्मत हेतु अलग किया जाएगा, जबकि उपयोग योग्य अंडरफ्रेम पर तुरंत दूसरी फिट ऊपरी बॉडी
लगाकर उसे पुनः परिचालन में लगाया जा सकेगा।

184.738 करोड़ की बचत का आंकलन
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पीआरओ मनोज कुमार सिंह कहते हैं कि मरम्मत के दौरान वैगनों के डिटेंशन समय में कमी आने से भारतीय रेलवे की वार्षिक आय में लगभग 106.99 करोड़ की वृद्धि होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, डिटेचेबल वैगन डिज़ाइन के कारण वैगनों के अनुपयोगी रहने से होने वाली संभावित राजस्व हानि में भी प्रतिवर्ष लगभग 77.748 करोड़ की कमी लाई जा सकती है। इस प्रकार, डिटेचेबल वैगन अवधारणा को अपनाने से भारतीय रेलवे को प्रतिवर्ष कुल लगभग 184.738 करोड़ की संभावित बचत एवं अतिरिक्त राजस्व लाभ प्राप्त हो सकता है।
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