झांसी। गिद्धों के सिमटते कुनबे से एक सदस्य और कम हो गया। शुक्रवार को एक गिद्ध की बिजली के तार की चपेट में आने से मौत हो गई। हालांकि, सूचना पर तत्काल वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन, इससे पहले ही प्रकृति के इस सफाई कर्मी की मौत हो गई।
गिद्धों की लगातार कम होती संख्या सरकार व पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी इस प्रजाति को बचाने के लिए तमाम कोशिशें की जा रही हैं। लेकिन, अब तक इनका प्रभावी असर देखने को नहीं मिला है। किसी जमाने में गिद्ध शहरों में भी आसमान में विचरण करते नजर आते थे, परंतु अब जंगलों में भी यह आसानी से देखने को नहीं मिलते। वन विभाग द्वारा साल 2013 में किए गए सर्वे में जिले में गिद्धों की संख्या महज 64 पाई गई थी। जबकि, इससे पहले 2011 में यहां 100 गिद्ध चिह्नित किए गए थे। लगातार छोटे होते कुनबे से शुक्रवार को एक गिद्ध और कम हो गया। कमिश्नरी के बाहर बिजली के तारों की चपेट में आने से एक गिद्ध फड़फड़ाकर जमीन पर गिर पड़ा, जिसे देखने वालों की यहां भीड़ लग गई। सूचना पाकर मौके पर वन विभाग की टीम भी पहुंच गई। लेकिन, इससे पहले ही गिद्ध ने दम तोड़ दिया।
प्रकृति के हैं सफाई कर्मी
झांसी। मृत पशुओं का मांस खाकर जमीन की सफाई करने की वजह से गिद्धों को प्रकृति का सफाई कर्मचारी भी माना जाता है। पर्यावरण संतुलन में इनकी महती भूमिका होती है। गिद्धों के न होने की वजह से आवारा कुत्ते मृत पशुओं का मांस खाते हैं। इससे गंदगी फैलती है और बीमारियां होने का खतरा भी बना रहता है। साथ ही कुत्तों में भी मांस खाने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। मांस न मिलने पर वह हमलावर हो जाते हैं।