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सावधान! कोरोना से नहीं बचाता ‘वायरस शट आउट’

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वायरस शट आउट - फोटो : REPORTERS
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झांसी। कोरोना महामारी के दस्तक देते ही वायरस से बचने के लिए सामाजिक दूरी, चेहरे पर मास्क व हैंड सैनिटाइजर ही कारगर कदम साबित हुआ है। लेकिन शहर के बाजारों व ऑनलाइन मार्केट में वायरस शट आउट के नाम से एक चीन के उत्पाद का काफी बोलबाला है। कंपनी का दावा है कि इसको पहनने व पास रखने से वायरस पास नहीं आता है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों ने इसे पूरी तरह से नकार दिया है। जिसके चलते यह प्रोडक्ट लोगों के साथ छलावा साबित हो रहा है।
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क्या है ‘वायरस शट आउट’
आईडी कार्ड की तरह दिखने वाले इस उत्पाद में नेमटैग की जगह केमिकल से भरा एक छोटा नीला पैकेट होता है। जो एक पोर्टेबल एयर प्यूरिफायर की तरह काम करता है। इस कार्ड को जेब व गले में टांगा जा सकता है। हालांकि इस कार्ड में किसी तरह की कोई भी गंध नहीं आती है। कंपनी द्वारा दावा किया जा रहा है कि इसको पास में रखने व गले में टांगने से एक मीटर के दायरे में फैले वायरस से महफूज रहा जा सकता है। जिसके चलते बिना फायदा जाने ही युवा, बच्चे व बुजूर्गों से लेकर हर कोई इस कार्ड को पहन रहा है।
अमेरिका, वियतनाम, थाइलैंड व फिलीपींस में प्रतिबंधित
कंपनी द्वारा इसकी वैधता एक माह तय की गई है। बाजार में यह कार्ड 130 रुपये से 150 रुपये तक में बेचा जा रहा है। यह उत्पाद कोरोना संक्रमण से बचा पाएगा इस दावे का कोई भी प्रमाणिक आधार नहीं है। जबकि, अमेरिका, वियतनाम, थाइलैंड व फिलीपींस में इसको प्रतिबंधित किया जा चुका है। लेकिन भारत के कई शहरों में यह धड़ल्ले से बिक रहा है। मिनर्वा चौराहा स्थित एक कैमिस्ट ने बताया कि खरीदने से पहले लोग इसके बारे में काफी जानकारी करते हैं। एक-दूसरे को देखकर लोग इसे खरीद रहे हैं। जिसके चलते लगातार बिक्री में इजाफा हो रहा है।
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इस उत्पाद में ब्लीचिंग के कण हैं। जो सिर्फ हल्के बैक्टीरिया से कुछ हद तक बचाव कर सकते हैं। यह कोरोना के वायरस को रोकने में पूरी तरह से असमर्थ है। किसी भी सरकारी संस्था से प्रमाणिक नहीं है।
अतुल उपाध्याय, सहायक आयुक्त, औषधि
कोरोना संक्रमण से सिर्फ सामाजिक दूरी, मास्क व हैंड सैनिटाइजर से ही बचा जा सकता है। वैज्ञानिक रूप से ‘वायरस शट आउट’ की कोई भी पुष्टि नहीं है। लोगों को गुमराह किया जा रहा है। सरकार को इस पर रोक लगा देनी चाहिए।
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डॉ. डीएस गुप्ता, फिजीशियन, जिला अस्पताल
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