कभी अफसर-बाबुओं की फाइल दबाने की आदत, तो कभी टेंडर निकालने में लापरवाही के झटकों से पस्त पड़े विकास कार्य अब नगर निकाय चुनाव की आचार संहिता लगने के कारण एक दिसंबर तक के लिए फिर लटक गए हैं। अब मतगणना होने के बाद ही अब इन कामों को गति मिल सकेगी। अफसरों को पहले से पता था कि अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में आचार संहिता लगेगी। यदि वह इसे गंभीरता से लेकर कार्यों को शुरू कराने का प्रयास करते तो लक्ष्मीताल के गंदे पानी को साफ करने का मामला, शहरवासियों की प्यास बुझाने का इंतजार कर रही पेयजल महायोजना, ग्वालियर रोड रेलवे क्रासिंग पर प्रस्तावित ओवरब्रिज या फिर पार्किंग की योजना फाइलों में कैद नहीं रहती।
टेंडर डलने और खुलने की कम उम्मीद
मुख्य सचिव के आदेश पर पेयजल महायोजना की टेंडर प्रक्रिया दूसरी बार भी निरस्त कर दी गई थी। ताजा निर्देश है कि पहले चरण की योजना का ठेका एक ही कंपनी को दिया जाए। ऐसा इसलिए कि काम तेजी से हो और कंपनी की जवाबदेही भी रहे। अब नई प्रक्रिया के तहत 15 नवंबर को टेंडर डालने और 17 नवंबर को खुलने थे। मगर इन तिथियों में टेंडर डलने और खुलने की कम ही उम्मीद है।
ग्वालियर रोड ओवरब्रिज
ग्वालियर रोड रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने की स्वीकृति मिल गई है। परंतु, शासन से अभी तक बजट जारी नहीं किया गया है। ऐसे में ओवरब्रिज का श्रीगणेश फिलहाल संभव नहीं है। रेलवे क्रासिंग पर लगने वाले जाम के कारण जो स्थिति पहले थी, अभी भी वही स्थिति है। इससे निजात मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
स्मार्ट सिटी
शहर को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किया मिल गया है। उम्मीद थी कि स्मार्ट सिटी बनने से शहर के विकास कार्यों में तेजी आएगी, लेकिन झांसी स्मार्ट सिटी लिमिटेड का गठन होने के अलावा अब तक कुछ नहीं हुआ है। अब शहर के विकास का प्लान बनाया जाना है, इसके लिए कंसलटेंट नियुक्त किया जाएगा और इसके लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जानी है।
अवैध पार्किंग
शहर में अवैध पार्किंग बड़ी समस्या है। गाड़ियां पार्क करने को कोई जगह नहीं होने के कारण मल्टीलेबल पार्किंग बनाने पर विचार चल रहा है। रानीमहल के सामने मल्टीलेबल पार्किंग, कोतवाली के नीचे अंडर ग्रांउड पार्किंग और महारानी लक्ष्मीबाई नेत्र चिकित्सालय के पास पार्किंग बनाने की सहमति बन गई थी, लेकिन अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हो सका।
केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना
देश की तीन प्रमुख परियोजनाओं में से एक केन-बेतवा नदी गठजोड़ परियोजना की लागत 2008 में 9,393 करोड़ रुपये आंकी गई थी, परंतु कोई काम नहीं होने से अब यह राशि बढ़कर 18 हजार 57 करोड़ रुपये पहुंच गई है। इस योजना पर भी जल्द ही काम शुरू होना था।
लक्ष्मी ताल का हाल-बेहाल
नारायन बाग के पास स्थित ऐतिहासिक लक्ष्मी तालाब को सुंदर बनाने के लिए 54 करोड़ रुपये की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया जा रहा है। इस योजना पर अप्रैल 2015 में काम शुरू हुआ था। काम को चार चरणों में पूरा होना है। इसमें 5.16 करोड़ रुपये बजट जल निगम को मिल चुका है। आचार संहिता लगने से इस योजना को एक माह और बजट नहीं मिल सकेगा।
बेतवा विहार कॉलोनी
झांसी विकास प्राधिकरण ने बूढ़ा में 2006 में बेतवा विहार कालोनी बनाने का सपना दिखाया था। 11 साल बाद भी सपना ही है। अब तक वहां पर न तो सड़कें हैं और न ही पार्क या पानी की कोई व्यवस्था है। पिछले दिनों आठ करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाकर टेंडर निकाले गए थे। मगर, अब आगे का काम भी रुक गया है।
विद्युत शवदाह गृह का काम बंद
उन्नाव गेट स्थित श्मशान घाट पर पर्यावरण का सुरक्षित रखने के लिए बुंदेलखंड का एकमात्र इलेक्ट्रिक शव दाहगृह का निर्माण कार्य पैसे की कमी के कारण बंद पड़ा है। इसके लिए साढ़े सात करोड़ रुपये की जरूरत है। नगर निगम शासन को चार चिट्ठियां भेज चुका है। अब इस काम पर भी ब्रेक लग गया है।
मेडिकल कॉलेज को बजट मिला, प्रस्ताव लटके
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को हाल ही में पौने तीन करोड़ रुपये का बजट मिला। पहली बार किसी सरकार ने ऑक्सीजन गैस के लिए अलग से तीस लाख रुपये दिए हैं। हालांकि, कई अहम प्रस्ताव अभी भी लटके हुए हैं। मेडिकल कॉलेज में आई बैंक खुलने की योजना ठंडे बस्ते में है। लगभग 45 करोड़ रुपये का बजट नहीं मिलने के कारण 500 बेड अस्पताल का निर्माण रुका है।