झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के नए ‘निजाम’ प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि जो मिला है, उससे आगे दिलाने का प्रयास किया जाएगा। कैंपस को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए उन्होंने कहा कि ईंधन चालित वाहनों का महीने में चार दिन प्रवेश प्रतिबंधित रखने का प्रयास होगा।
‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में उन्होंने विद्यार्थियों की उपस्थिति और मूल्यांकन में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया।
उच्च शिक्षा में कमियों के सवाल का जवाब देते हुए नवनियुक्त कुलपति प्रो. दुबे ने कहा कि कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति कम होने से पढ़ाई का फल नहीं निकल पाता है, इसलिए छात्रों की उपस्थिति शत-प्रतिशत सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। शिक्षकों की उपस्थिति के सवाल पर बोले, जब छात्र आएंगे तो शिक्षक भी आएंगे। प्रो. दुबे ने कहा कि वह मौजूदा मूल्यांकन प्रणाली से संतुष्ट नहीं हैं।
वहीं, कुलपति प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय द्वारा लागू किए गए ऑनलाइन मूल्यांकन सिस्टम की बाबत प्रो. दुबे ने कहा कि इसको जारी रखा जाएगा। बोले कि प्रो. पांडेय ने कई काम बहुत अच्छे किए हैं, उन सभी कार्यों को आगे ले जाऊंगा। वहीं, नैक का ‘ए’ ग्रेड दिलवाने के लिए कोई विशेष योजना पूछने पर उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में गोरखपुर विश्वविद्यालय में हुए नैक के निरीक्षण के समय वह भी उसी व्यवस्था से जुड़े थे।
उसी का लाभ उठाते हुए और बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा। कैंपस को प्रदूषण मुक्त बनाने की इच्छा जताते हुए उन्होंने कहा कि ईंधन चालित वाहनों का महीने में चार दिन प्रवेश प्रतिबंधित रखने का भी प्रयास होगा।
1982 में गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़े
कुशीनगर निवासी प्रो. सुरेंद्र दुबे ने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से ही पढ़ाई की है। उन्होंने एमए, पीएचडी और डीलिट की उपाधि ली है। प्रो. दुबे के मुताबिक सन् 1976 से 1982 तक उन्होंने पडरौना के उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पढ़ाया है। इसके बाद सन् 1982 में वह गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़े।
वह विश्वविद्यालय में एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारी, परीक्षा समन्वयक, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, परीक्षा नियंत्रक, 2013 में हुई बीएड प्रवेश परीक्षा के राज्य समन्वयक, हिंदी के विभागाध्यक्ष, कला संकाय के डीन समेत कई पदों पर रह चुके हैं। 30 जून 2015 को वह गोरखपुर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
शानदार रहा वीसी का कार्यकाल
मौजूदा वीसी प्रो. अविनाश चंद्र पांडेय का तीन साल का कार्यकाल शानदार रहा। प्रो. पांडेय ने अपने कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था सुधार, शोध को बढ़ावा देने, ‘डिजिटल’ विश्वविद्यालय तैयार करने, वार्षिक परीक्षाओं में काफी हद तक नकल पर अंकुश लगाने, बीयू को आईएसओ प्रमाणित कराने समेत कई अहम कार्य किए हैं।
विश्वविद्यालय के विभिन्न स्तरों पर व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने के लिए वीसी ने कड़े कदम उठाए। उनके द्वारा तैयार किए गए ‘बीयू मॉडल’ को राजभवन ने प्रदेश के समस्त राज्य विश्वविद्यालयों में प्रभावी करने के निर्देश दिए। अंतिम समय तक वह बीयू को नैक का ए ग्रेड दिलाने के लिए तैयारियों में जुटे हुए थे। इसके अलावा भी उन्होंने कई आगामी योजनाएं तैयार की थी।
शिक्षकों ने दी फेयरवेल पार्टी
कुलपति प्रो. अविनाश पांडेय को बीयूआईसी में शिक्षकों द्वारा शाम को फेयरवेल पार्टी दी गई। इस दौरान शिक्षकों ने वीसी द्वारा किए गए कार्यों को याद किया और वीसी ने भी सभी का सहयोग के लिए आभार जताया। बीयू के वीसी बदलने से जहां कई चेहरे लटक गए, वहीं कुछ खिल उठे।