झांसी। इस्तेमाल की गई पीपीई किट से कम से कम दो दिन तक संक्रमण का पूरा खतरा रहता है। इसलिए किट का चाहे मास्क हो या गाउन, उसको इधर-उधर न फेंकें, बल्कि उसके लिए निर्धारित ढक्कन बंद पीली डस्टबिन में ही डालें और अस्पतालों को भी चाहिए कि इस बायोमेडिकल वेस्ट (अस्पताल के कचरे) के निस्तारण की व्यवस्था दुरुस्त रखें। यह जानकारी जनपदीय क्वालिटी एश्योरेंस परामर्शदाता डॉ. मनीष खरे ने दी।
कोविड-19 के खिलाफ जंग में जुटे स्वास्थ्य कर्मियों, अस्पतालों व अन्य कार्यस्थलों के स्टाफ को सुरक्षित बनाने में पीपीई किट की बड़ी भूमिका है। बशर्ते इस्तेमाल के बाद उसका सही तरीके से निस्तारण किया जाए। इस्तेमाल के बाद इधर-उधर खुले में छोड़ देने से संक्रमण का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। अस्पतालों, एंबुलेंस, एयरपोर्ट और यहां तक कि श्मसान घाटों तक पर खुले में फेंकी गई पीपीई किट के बारे में डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा करके हम खुद को बचा नहीं रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी मुश्किल में डालने का काम कर रहे हैं।
डॉ. मनीष ने बताया कि जनपद में बायो मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन हेतु विशेष इंतजाम किए गए हैं। अस्पतालों के सभी डस्टबिन में दोहरी पॉलिथीन लगाई जाती हैं। इनको दैनिक आधार पर एक प्रतिशत हाइपोक्लोराइड घोल से विसंक्रमित किया जाता है। उपयोग किये गए पीपीई किट एवं मास्क को पालीथीन में बंदकर केवल पीले रंग के डस्टबिन में निस्तारित किया जाता है। चिकित्सालय में आने वाले सभी व्यक्तियों को भी इन नियमों का पालन करना चाहिए तथा कचरे को उसके निर्धारित डस्टबिन में ही डालना चाहिए।