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अकीदत के साथ मनाया गया उर्स मुबारक

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झांसी। बृहस्पतिवार को ईदगाह स्थित हजरत सैय्यदना मौलाना निजामुलहक कलंदर उवैशी रहमतुल्लाह अलैह का 82वां उर्स अकीदत के साथ मनाया गया। उर्स के दौरान जायरीनों ने मजार ए अकदस पर चादर और गुलपोशी कर दुआ-ए-खैर मांगी। फातिहा के बाद तबर्रुक और लंगर को तकसीम किया गया।
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हर साल की तरह इस वर्ष भी उर्स को बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। उर्स में भोपाल, इंदौर, अजमेर, आगरा, मेरठ, फिरोजाबाद, शिकोहाबाद सहित देश भर के कई शहरों के जायरीन शामिल हुए। उर्स के दौरान सुबह फर्ज के वक्त मजार का गुस्ल किया गया। दोपहर मजार पर चादर व फूल चढ़ाए गए। शाम को दरगाह शरीफ में कुरानख्वानी का आयोजन किया गया। जिसमें जायरीनों ने कुरान-ए-पाक की तिलावत की। शाम को फातिहा के बाद तबर्रुक को तकसीम किया गया। दरगाह कमेटी के सदस्यों द्वारा लंगर को भी बांटा गया। देश भर से आए मेहमानों का शुक्रवार को रवानगी की जाएगी।
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सालों से हजरत के दीदार के लिए आ रहे हैं। इस जगह पर बिन मांगे ही दिल की मुराद पूरी हो जाती है। हर साल उर्स के मौके पर जरूर आते हैं।
अंजू सिंह, जायरीन
निजामुलहक कलंदर उवैशी रहमतुल्लाह अलैह के दर की खिदतम पूर्वजों के समय से कर रहे हैं। इस दर से काफी यकीन और अकीदा है।
कादिर खान, खिदमतगार
वर्ष 1999 से बाबा का मुरीद हूं। हर साल उर्स के मौके पर अजमेर से सपरिवार आता हूं। इस दर से बिन मांगे ही सब कुछ मिल जाता है।
भूपेंद्र सिंह ठाकुर, जायरीन,
वालिद हजरत के मुरीद थे। बचपन में उन्हीं के साथ फिरोजाबाद से यहां पर आता था। वालिद के बाद अब हर साल इस दर का दीदार करने के लिए आता हूं।
जमालुद्दीन, जायरीन
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