झांसी। यूरिया कालाबाजारी पर रोक के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे। लगातार यूरिया खाद की कालाबाजारी सामने आ रही है। बरुआसागर में जांच के दौरान एक खाद विक्रेता कालाबाजारी करते पकड़ा गया। छापा के दौरान मालूम चला कि उसने पचास बोरी यूरिया ऐसे व्यक्ति के नाम बेंच दी जिसके पास खेती की जमीन ही नहीं। इस मामले के सामने आने के बाद सकते में आए अफसरों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
बुवाई शुरू होने के साथ यूरिया की मांग एकाएक बढ़ गई है। मांग में इजाफा होते ही खाद दुकानदारों ने भी मनमानी करनी शुरू कर दी। रक्सा, टहरौली, समेत कई स्थानों पर ओवररेटिंग समेत कालाबाजारी की शिकायतें मिल रही थीं। इसको देखते हुए खाद एजेंसियों की जांच कराई जा रही। जिला रक्षा अधिकारी विवेक कुमार की अगुवाई में कुछ दिन पहले बरुआसागर, बस अड्डे के समीप स्थित चित्रांश ट्रेडर्स में छापेमारी की। अधिकारियों ने जब दस्तावेज की पड़ताल की तब एक ही आधार संख्या पर पचास बोरी यूरिया की बिक्री दर्ज थी। पड़ताल में उसका घर गोदाम के पास ही मिला। अधिकारियों की पूछताछ में उसने बताया कि वह कृषि कार्य करता ही नहीं, न ही उसके पास कृषि योग्य भूमि है। इतने व्यापक पैमाने पर हो रही गड़बड़ी देख कृषि अधिकारी सकते में आ गए। बता दें, कालाबाजारी रोकने के लिए न सिर्फ नकदी खाद देने पर रोक लगा दी गई बल्कि प्रति एकड़ की दर से ही किसानों को खाद दी जा रही है। कृषि रक्षा अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को सौंप दी गई है। जिला कृषि अधिकारी कमलेश सिंह के मुताबिक आरोपी संचालक को नोटिस दी गई है। जवाब मिलने के बाद अगर शिकायत सही पाई गई तब उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी उजागर हो चुके ऐसे मामले
इसके पहले लॉकडॉउन के दौरान भी इसी तरह खाद की कालाबाजारी के तमाम मामले सामने आए थे। मऊरानीपुर में भी ऐसे लोगों के नाम से यूरिया खाद बेंच दी गई जिनके पास कृषि भूमि नहीं थी। पूरे प्रदेश में इस तरह के मामले उजागर होने के बाद सरकार ने यूरिया बिक्री के तमाम प्रावधानों में बदलाव किया लेकिन, इसके बावजूद कालाबाजारी में रोक नहीं लगाई जा सकी।