झांसी। विकास विभाग के उर्दू अनुवादक को जिला विकास अधिकारी ने गबन के आरोप में बर्खास्त कर दिया है। अनुवादक पर बामौर ब्लॉक में तैनाती के दौरान स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 45.50 लाख रुपये के गबन का आरोप है। बर्खास्त कर्मचारी से गबन की राशि भी वसूल की जाएगी।
उर्दू अनुवादक इंतजार मेहंदी वर्ष 2008-09 से 2013-14 के मध्य बामौर ब्लॉक में पदस्थ थे। उन पर स्वर्ण जयंती स्वरोजगार योजना के तहत फर्जी समूहों का गठन कर अपने चहेतों के नाम से पैसे निकालने का आरोप लगाया गया था। आरोप था कि जिन लोगों को फर्जी लाभार्थी बनाकर पैसा निकाला गया है, उनमें इंतजार मेहंदी की पत्नी भी शामिल हैं। शिकायत मिलने पर सीडीओ ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। उपायुक्त मनरेगा को जांच अधिकारी बनाया गया था।
जांच शुरू होते ही इंतजार 31 दिसंबर 2013 से बिना सूचना के कार्यालय से अनुपस्थित हो गए थे। अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें 11 अप्रैल 2014 को निलंबित कर दिया गया था। एक जून 2014 को उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट आने के बाद जिला विकास अधिकारी ने इंतजार मेहंदी से स्पष्टीकरण तलब किया था। स्पष्टीकरण संतोषजनक न मिलने पर बृहस्पतिवार को डीडीओ प्रहलाद सिंह ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं। उन्होंने बताया कि बर्खास्त कर्मचारी से चालीस किस्तों में गबन की राशि वसूली जाएगी, इसके लिए तहसील प्रशासन को पत्र भेजा जाएगा। साथ ही उसकी दो वार्षिक वेतन वृद्धि पर भी रोक लगा दी गई है।