झांसी। बजट की कमी से आठ माह से रुके अरबन हाट के निर्माण कार्य के फिर से शुरू होने की उम्मीद जग गई है। बकाया राशि के भुगतान के लिए भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की आपत्तियां दूर कर दी गईं हैं। झांसी विकास प्राधिकरण ने नया प्रस्ताव मंत्रालय भेज दिया है।
हस्त शिल्पियों को उनके उत्पाद बेचने को उचित बाजार मिल सके, इसके लिए किले की तलहटी में स्थित क्राफ्ट मेला ग्राउंड में अरबन हाट का निर्माण किया जा रहा है। छह एकड़ क्षेत्रफल में 4.45 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होने वाली इस परियोजना पर काम अगस्त 2014 में शुरू हुआ था। निर्माण की अवधि मई 2015 तय की गई थी। लेकिन, तय अवधि के एक साल बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है। हालात यह हैं कि बजट के अभाव में पिछले आठ माह से काम रुका हुआ है। 1.05 करोड़ की अंतिम किस्त का भुगतान न होने से काम नहीं हो पा रहा है। बकाया राशि के भुगतान के लिए जेडीए पिछले एक साल से प्रयासरत है, लेकिन वस्त्र मंत्रालय दो बार आपत्ति लगा चुका है। पहले सीए की रिपोर्ट न होने से आपत्ति लगी थी, दुबारा काउंटर साइन की कमी से मंत्रालय ने आपत्ति लगा दी। अब जेडीए ने यह सभी आपत्तियां निस्तारित कर प्रस्ताव भेजा है। इससे जल्द ही बजट मिलने की उम्मीद जग गई है।
‘बकाया राशि के भुगतान के लिए आपत्तियों का निस्तारण कर दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द बजट मिल जाएगा। अरबन हाट का निर्माण लगभग सत्तर फीसदी हो चुका है। बजट मिलते ही जल्द काम पूरा कर लिया जाएगा।’
- आर के वर्मा, सहायक अभियंता - जेडीए
अरबन हाट एक नजर में
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- लागत 4.45 करोड़
- अब तक मिले 3.40 करोड़
- छह एकड़ क्षेत्रफल
- 52 दुकानें
- 04 प्रदर्शनी हॉल
- 01 म्यूजियम
- ओपन थियेटर
- एडमिनिस्ट्रेशन ब्लाक
- एटीएम
- पावर हाउस
- एटीएम
रियायती दरों पर मिलेंगी दुकानें
- जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक रविकांत शुक्ला ने बताया कि अरबन हाट में पंजीकृत शिल्पियों को रियायती किराये पर दुकानें दी जाएंगी। किराया निर्माण पूरा होने के बाद तय होगा। दुकानों से अधिक आवेदन आने पर लाटरी पद्धति से आवंटन होगा। उन्होंने कहा कि शिल्पियों का सर्वे हो रहा है, जिसमें उनकी सही संख्या निकलकर सामने आएगी।
दीवार टूट गई
अरबन हाट का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ है और इसकी दीवार का एक हिस्सा टूट गया। चौकीदार का कहना है कि हाट के पीछे की दीवार आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने तोड़ दी है। वे वहां घुस आते हैं। शराब और जुए का अड्डा बना लिया है। पास की बस्ती वाले यहां शौच करने आ जाते हैं। टोकने पर धमकाते हैं। सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।