झांसी। कुदरत के खेल भी निराले हैं। जब खरीफ की बुवाई शुरू हुई तब पानी की जरूरत थी, लेकिन पानी नहीं बरसा और जब बुवाई पूरी हो गई तो इतना पानी बरस गया कि मूंग, उड़द और तिल खराब होने का खतरा मंडराने लगा। खासकर उन खेतों में जहां पानी भरता है, वहां यदि पानी भरा रहता है तो फसल खराब होने का अंदेशा है।
जिले में 2,43,316 हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है। शुरूआत में खेतों में नमी नहीं होने के कारण किसान परेशान थे, उन्हें लग रहा था कि बुवाई नहीं हो पाएगी। लेकिन हल्का पानी बरसने से उम्मीद जागी और बुवाई शुरू कर दी गई। सबसे अधिक तिल की बुवाई की गई। इसके अलावा मूंगफली, सोयाबीन, उड़द, मूंग, अरहर, धान, मक्का, बाजरा और मोटे अनाज की बुवाई की गई। बुवाई के बाद पानी बरसने से उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी। हल्का पानी बरसने से मूंगफली और तिल की फसल लहलहाने लगी।
लेकिन, पिछले तीन दिन से हो रही तेज बरसात के कारण खेतों में पानी भर गया। इससे उड़द, मूंग और तिल को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। खासकर ऐसे खेत जहां पानी भरने की गुंजाइश अधिक है, उन्हीं खेतों में बोई गई फसल को खतरा है, लेकिन जो खेत हल्के ढालू हैं और जिनमें पानी रुकता नहीं है। उन खेतों मं फसल अच्छी होने की संभावना है। क्योंकि, खरीफ फसलों की खासियत होती है कि खेत में पानी न भरे तो अच्छी पैदावार होती है। इसके अलावा बुवाई में पिछड़ने से भी फसल की जड़ कमजोर रह जाती हैं और बरसात अधिक होने से पौधे नीचे गिर जाते हैं। ऐसे में जो किसान जागरूक हैं, वह खेतों में जलभराव नहीं होने देते हैं और यदि अधिक जलभराव हो जाता है तो पानी को खेत से बाहर निकाल देते हैं।
धरती प्यासी है। फिर भी यदि खेतों में जलभराव तीन से चार दिन तक रहता है तो फसल को नुकसान हो सकता है। मौसम में नमी रहने के कारण फसल लहलहाएगी। इसके अलावा नमी से कीड़े भी पनप सकते हैं।
- विवेक, जिला कृषि रक्षा अधिकारी