झांसी। रेलवे ने अब पात्र विकलांगों को यूनिक कार्ड इश्यू करना शुरू कर दिया है, मगर सत्यापन कार्य धीमा होने से कार्ड बनने में अधिक समय लग रहा है। इससे पात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रेलवे अस्थि विकृति से विकलांग/ मूक तथा बधिर/ मानसिक रूप से विकृत/ नेत्रहीन व्यक्तियों/ रोगियों व उनके केयर टेकर (एक व्यक्ति) को किराए में पचास प्रतिशत की रियायत देता है। इसके लिए पचास प्रतिशत या इससे अधिक विकलांगता आवश्यक है।
अस्पतालों से जारी होने वाले प्रमाण पत्रों के आधार पर अभी लाभार्थियों को आरक्षित व अनारक्षित टिकट में रियायत दी जाती थी, मगर अब रेलवे ने लाभार्थियों को विकलांग पहचान पत्र (यूनिक आईडी) जारी करना शुरू कर दिया है। इस कार्ड में दर्ज यूनिक आईडी नंबर के आधार पर ही टिकट बन सकेगा।
यूनिक आईडी पाने के लिए पूरे रेल मंडल से तीन हजार से अधिक लाभार्थी आवेदन कर चुके हैं, मगर रेलवे अभी तक आधा सैकड़ा पात्रों को ही यूनिक कार्ड इश्यू कर सका है।
दरअसल, रेलवे को पूर्व में बने प्रमाण पत्रों के सत्यापन में परेशानी उठानी पड़ रही है। वाणिज्य विभाग इंस्पेक्टरों को संबंधित अस्पताल में सत्यापन के लिए भेजा जाता है। अस्पताल में समय पर बाबू का सहयोग मिल जाए, इस बात का भी ध्यान रखना पड़ता है।
सत्यापन कार्य में लग रहे समय के कारण पात्रों की फाइलें कार्यालयों में टेबल पर पड़ी हुई हैं।
इस संबंध में जनसंपर्क अधिकारी गिरीश कंचन ने बताया कि यूनिक आईडी पर ही टिकट बन रहे हैं। चूंकि, प्रत्येक आवेदन की जांच के लिए रेलवे का एक वाणिज्य निरीक्षक संबंधित अस्पताल आवेदन के सत्यापन के लिए जाता है, पूरे मंडल से आवेदन आ रहे हैं, इस कारण यूनिक आईडी जारी करने में समय लग रहा है।