शहर के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर के डॉक्टर पर गलत रिपोर्ट देने की शिकायत की जांच शुरू हो गई है। शिकायतकर्ता ने डीएम से शिकायत की है कि जन्मजात विकार होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड सेंटर का डॉक्टर सामान्य की रिपोर्ट देता रहा। बच्चे का जन्म होने के अगले दिन ही सांसें थम गईं। मामले की न्यायिक जांच कराकर कार्रवाई की मांग की।
महिला ने डीएम से शिकायत की है कि सदर बाजार स्थित अल्ट्रासाउंड सेंटर पर नौ महीने की गर्भावस्था के दौरान पांच अल्ट्रासाउंड कराए। हर बार डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड की सामान्य रिपोर्ट दी। मौखिक रूप से भी यह बताया गया कि गर्भावस्था में शिशु बिल्कुल सामान्य है। किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। मगर जब सिजेरियन डिलीवरी हुई तो डॉक्टर ने बताया कि बच्चा कई प्रकार के जन्मजात विकास से ग्रसित है। अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में सिजेरियन डिलीवरी हुई और अगले ही दिन बच्चे की सांसें भी थम गईं।
डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर के बालरोग विशेषज्ञ ने यह भी बताया कि गर्भावस्था के तीन से चार महीने में होने वाले लेवल-2 के अल्ट्रासाउंड में जन्मजात विकार या डाउन सिंड्रोम के बारे में बताया जाना चाहिए था। मगर अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर ने लेवल-2 का अल्ट्रासाउंड भी सामान्य दिया। साथ ही कहा कि शिशु बिल्कुल ठीक है और किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। शिकायतकर्ता ने मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
पीडियाट्रीशियन और काम कर रहे रेडियोलॉजिस्ट का?
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर रेडियोलॉजिस्ट नहीं है, बल्कि बाल रोग विशेषज्ञ है। सवाल किया कि रेडियोलॉजिस्ट नहीं होते हुए भी इनको अल्ट्रासाउंड करने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। समिति में मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संजया शर्मा, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया और रेडियो डायग्नोसिस विभाग की प्रोफेसर डॉ. रचना चौरसिया हैं। कमेटी को जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।
- आंद्रा वामसी, डीएम