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सूदखोरों के जाल में फंसे सैकड़ों लोग

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झांसी। जिले में सूदखोरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। इनमें सबसे ज्यादा लोग थाना प्रेमनगर क्षेत्र के रहने वाले सूदखोरों के जाल में फंसे हैं। सूदखोरों ने इन लोगों को पांच से दस प्रतिशत महीने ब्याज दर से पैसा दे रखा है। इनमें ज्यादातर अवैध रूप से सूदखोरी का धंधा कर रहे हैं। इनके चंगुल में फंसे कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन पर इस कदर ब्याज चढ़ गया है कि अब उसे चुकाना उनके लिए मुश्किल है।
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जिले में करीब 56 लाइसेंसी साहूकार हैं, लेकिन अवैध रूप से यह धंधा करने वालों की संख्या सैकड़ों में है। महानगर में सूदखोरी का धंधा बेरोकटोक चल रहा है। सूदखोरों के चंगुल में फंसने के बाद कम ही कर्जदार उनके जंजाल से बाहर आ पाते हैं। अधिकतर तो ब्याज ही भरते रह जाते हैं। सूदखोर रकम और ब्याज की वसूली के नाम पर कर्जदार को जमकर लूटते हैं। कई बार तो ब्याज इतना ज्यादा हो जाता है कि कर्जदार का जेवर, मकान, प्लाट तक सूदखोर हथिया लेते हैं।
खातीबाबा निवासी एक व्यक्ति ने प्रेमनगर में रहने वाले एक सूदखोर से एक लाख रुपये पांच फीसदी ब्याज पर लिए थे। अब कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं। इनका प्लाट भी सूदखोरों ने रख लिया है। थाना प्रेमनगर क्षेत्र में रहने वाले अधिकांश सूदखोर प्रभावशाली है और वे लोगों को खौफ में रखते हैं। कई सरकारी कर्मचारी भी इनके चंगुल में हैं। सूदखोरों ने उनके एटीएम भी तक अपने पास रख लिए हैं। खाते में वेतन आते ही वे कर्मचारी को बुलाकर रुपये निकाल लेते हैं।
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नंबर 1
रेलकर्मी का मकान रख लिया था गिरवी
थाने के पास रहने वाले एक व्यक्ति ने तीन लाख रुपये सूदखोरों से दो साल पहले लिए थे। धीरे-धीरे ब्याज बढ़ने के बाद उसका प्लाट रख लिया। लंबी पंचायत के बाद राजीनामा हुआ। जहां तीन गुना रकम देने के बाद प्लाट छोड़ा।
नंबर 2
चेक बुक रखी है गिरवी
कमल सिंह कॉलोनी निवासी एक रेलकर्मी ने भी एक लाख लिए थे। वह एक साल तक रकम चुकाते रहे, लेकिन बाद में ब्याज बढ़ा दिया। जिसके बाद रकम न चुकाने में असमर्थ रेलकर्मी की चेकबुक भी हस्ताक्षर कराकर सूदखोरों ने गिरवी रख ली है।
शिकायत करने से कतराते हैं लोग
बेहद जरूरतमंद व्यक्ति ही सूदखोर से कर्ज लेता है, इसलिए उस पर कर्ज चुकाने का खासा दबाव रहता है। कर्जदार तो पूरी रकम चुकाना चाहता है, मगर ब्याज की रकम ही इतनी ज्यादा होती है कि उसकी कमाई इसे चुकाने में ही चली जाती है। सिर पर कर्ज होने की वजह से वह पुलिस प्रशासन से शिकायत करने का जोखिम उठाने में कतराता है। ऊपर से सूदखारों का रसूख भी उनको ऐसा करने से रोक देता है।
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साहूकारी का लाइसेंस लेने के लिए नियम
- एसएसपी और एसडीएम की रिपोर्ट पर ही मिलता है लाइसेंस
- हर साल कराना पड़ता है लाइसेंस का नवीनीकरण
- लाइसेंस और नवीनीकरण का शुल्क 15 रुपये
- लाइसेंस लेने के लिए बैंक में पैसा होना जरूरी
- बैंक की तरह सालाना ब्याज दर पर ही लिया जा सकता है ब्याज
- बिना लाइसेंस छह माह की सजा या पांच हजार रुपये जुर्माना
अगर कोई सूदखोरों के उत्पीड़न से परेशान है तो वह पुलिस से सीधे शिकायत कर सकते हैं। ऐसे मामलों को वह थानों से तलब कर कार्रवाई कराएंगे।
विवेक त्रिपाठी, एसपी सिटी
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