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Jhansi News: अल्ट्रासोनिक तरंगों से टाइप-टू टायबिटीज का इलाज संभव

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संगोष्ठी में डॉ. धीरेंद्र बोले - पहले चरण में चूहों पर किया गया ट्रायल सफल, अब इंसान पर तैयारी
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अल्ट्रासोनिक तरंगों से टाइप-टू डायबिटीज के उपचार का तरीका खोजा जा रहा है। इससे मानव शरीर में इंसुलिन बढ़ाने और रक्त में शर्करा का स्तर कम करने में मदद मिलेगी। पहले चरण में चूहों पर इसका परीक्षण सफल रहा। अब इंसान पर इसकी तैयारी चल रही है। यह शोध सफल हुआ तो टाइप-टू-डायबिटीज के रोगियों के लिए बड़ी राहत होगी।
बीयू में रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. धीरेंद्र शर्मा करीब 25 वर्ष से अल्ट्रासोनिक तरंगों पर शोध कर रहे हैं। महारानी लक्ष्मीबाई पैरामेडिकल कॉलेज में शनिवार को हुई संगोष्ठी में डॉ. धीरेंद्र शर्मा ने बताया कि अल्ट्रासोनिक तरंगों से टाइप-टू डायबिटीज का इलाज बिना किसी दवा के संभव है। अल्ट्रासोनिक तरंगें मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।
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पहले चरण में चूहों पर इसका परीक्षण सफल हुआ है। अब इंसानों पर इसकी तैयारी है। यदि परिणाम सार्थक आए तो मधुमेह के प्रबंधन के लिए यह प्रभावी और सुरक्षित तरीका साबित होगा। उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान चूहों के अग्नाशय पर पांच मिनट तक अल्ट्रासोनिक तरंगों को डाला गया। इसके बाद जब चूहों के शरीर में इंसुलिन के स्तर की जांच की गई तो वह पहले से 20 फीसदी अधिक मिला।
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