झांसी। मेडिकल कॉलेज में बच्चों की इमरजेंसी में पलंग की संख्या कम होने के कारण एक पलंग पर दो से तीन बच्चों को भर्ती करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा सालों से इमरजेंसी के विस्तार की कवायद की जा रही है, लेकिन आज तक इसे अमलीजामा नहीं पहनाया गया है। जिसका खमियाजा मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है।
झांसी का मेडिकल कॉलेज बुंदेलखंड क्षेत्र का सबसे बड़ा चिकित्सीय संस्थान होने के कारण शहर के अलावा आसपास के जिलों के लोग इलाज कराने के लिए आते हैं। जिसके चलते संस्थान में हमेशा मरीजों की भरमार रहती है। वर्तमान में अस्पताल की ओपीडी में लगभग दो से तीन हजार लोग इलाज करने के लिए आ रहे हैं। लगभग दो सौ से अधिक बच्चे होते हैं। गंभीर होने पर पंद्रह से बीस बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है।
वहीं इमरजेंसी स्थिति में भी पांच से छह बच्चे रोजाना भर्ती होते हैं, लेकिन अस्पताल की इमरजेंसी में सिर्फ सात ही पलंग होने पर एक ही पलंग पर दो से तीन बच्चों को भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। ऐेसे में सबसे अधिक परेशानी का सामना अस्पताल में भर्ती बच्चों के साथ ही तीमारदारों को करना पड़ता है।
इस संबंध में अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरिश्चंद्र आर्य ने बताया कि इमरजेंसी के विस्तार के लिए निर्माण कार्य कराया जाना है। जिसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य को शुरू कर दिया जाएगा।
पलंग नहीं मिला तो तीमारदार ने जमीन पर लिटा दी बच्ची
मेडिकल कॉलेज में सोमवार को मौदहा गांव से आठ वर्षीय बच्ची नंदिनी को उसके घरवाले बेहोशी की हालत में लाए थे। बच्ची को बुखार आ रहा है। इस दौरान जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो वहां इमरजेंसी में कोई बेड खाली नहीं मिला। इससे परिजनों ने बच्ची को इमरजेंसी के बाहर जमीन पर ही लिटा दिया। उधर, कुछ देर बाद डॉक्टर इमरजेंसी पहुंचे तो बच्ची को जमीन पर लेटा देखा। इस पर उसे तुरंत अन्य वार्ड में भर्ती कराया गया।