झांसी। जिपं अध्यक्ष सीट निर्विरोध जीतने में कामयाब रही भाजपा ब्लॉक प्रमुुख सीट के सियासी समीकरणों में बुरी तरह उलझ गई। इसके चलते बबीना एवं बामौर में पार्टी के भीतर की टूट साफ दिखने लगी है। इन दोनों जगहों में भाजपा कार्यकर्ता ही एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं।
ब्लॉक प्रमुख चुनाव शुरू होते ही बबीना में राजनीतिक दिग्गजों के बीच शह-मात का खेल जमकर शुरू हो गया। इन चुनावों के जरिए अगामी विधानसभा चुनाव की सियासी गोटियां बिठाए जाने लगी हैं। बबीना विधानसभा पिछड़ा बहुल्य सीट है। यहां से बृजेंद्र सिंह राजपूत एवं भरत पाल दावा ठोंक रहे हैं। बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा का गृह ब्लॉक होने के बावजूद भाजपा यहां से अपना अधिकृत उम्मीदवार तक घोषित नहीं कर सकी। यह दोनों उम्मीदवार पार्टी केगले की फांस बने हैं। बताया जा रहा है पार्टी पदाधिकारी एक उम्मीदवार के पक्ष में है लेकिन, वोटबैंक के खतरे को देखते हुए विधायक का धर्मसंकट उम्मीदवार चुनने में भारी पड़ गया। इस वजह से कोई उम्मीदवार तय नहीं हो सका हालांकि अंदरखाने से यह दावा भी किया जा रहा कि अगामी विधानसभा चुनाव में दोनों जातियों के वोटबैंक साधने की खातिर जानबूझकर सियासी ड्रामा रचा गया लेकिन, इन सबके बीच पार्टी की खूब किरकिरी हो रही है। अब भाजपा उम्मीदवार मैदान से हटने को राजी नहीं। ऐसे में सपा उलटफेर करने की स्थिति में पहुंच गई। यही हाल गरौठा विधानसभा के बामौर ब्लॉक में भी दिखाई पड़ रहा है। यहां ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी के लिए मुकाबला दो भाजपा कार्यकर्ताओं के ही बीच है। अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित इस सीट से मूर्ति देवी एवं चंद्रभान ने दावा ठोंक रखा है। अगर इनमें से एक भी नामांकन वापस ले लेता जब भाजपा के खाते में निर्विरोध निर्वाचित सीट की संख्या बढ़ जाती लेकिन, यहां दो अलग-अलग गुटों की आपसी रस्साकस्सी के चलते यह एका संभव नहीं हो सकी। भाजपा विधायक जवाहर लाल राजपूत भी दोनों उम्मीदवारों के बीच एका कराने में सफल नहीं हो सके।