संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। 22 वर्ष पूर्व विभिन्न वारदातों को अंजाम देकर समाज में भय और आतंक फैलाने के मामले में दोषसिद्ध रामपाल यादव और राजू यादव को विशेष न्यायाधीश (गिरोह बंद अधिनियम) विजय कुमार वर्मा -प्रथम के न्यायालय ने 10-10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 21 सितंबर 2002 को पुलिस बल के साथ गश्त के दौरान थाना नवाबाद क्षेत्र अंतर्गत चौकी विश्वविद्यालय प्रभारी नरेंद्र कुमार को ग्राम मैरीवासियों ने क्षेत्र में सक्रिय एक गैंग के संबंध में जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि गांव के रामपाल सिंह यादव, उसके साथी सिल्टू यादव एवं राजू यादव का एक संगठित गिरोह है। इसका मुखिया रामपाल है। यह लोग आम जनता के साथ मारपीट, गाली-गलौज कर डराते धमकाते हैं और रुपयों की उगाही करते हैं। महिलाओं के साथ अभद्रता करते हैं। आस-पड़ोस के गांवों में भी इनका इतना भय और आतंक है कि लोग पलायन करने को मजबूर है। गैंग के सरगना और अन्य के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं। तीनों के खिलाफ थाना-नवाबाद में मुकदमा दर्जकर विवेचना के बाद आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया गया। सिल्टू यादव के न्यायालय में लगातार अनुपस्थित रहने के कारण उसके खिलाफ 23 अक्टूबर 2024 को स्थायी गैर जमानती वारंट जारी किया गया। प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में दोषियों को सजा सुनाई।
दोनों खतरनाक अपराधियों को पूर्व में भी सुनाई जा चुकी है सजा
गैंग लीडर रामपाल यादव व राजू यादव दोनों ही खतरनाक अपराधी हैं। इनके खिलाफ कई संगीन मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। विशेष लोक अभियोजक सूर्य प्रकाश पाठक ने बताया कि दोनों को हत्या, प्राणघातक हमले सहित कई मामलों में वांछित होने के कारण दंडित किया गया है। राजू यादव को पूर्व में भी हत्या के मामले में दोषसिद्ध होने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।