झांसी। न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश न्यायालय संख्या आठ राधेमोहन श्रीवास्तव की अदालत ने महिला की हत्या का दोष सिद्ध होने पर दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 35-35 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार दोहरे के अनुसार 7 अप्रैल 2011 को थाना मऊरानीपुर क्षेत्र में छतरपुर मार्ग पर एक महिला का शव मिला था। हत्या कर शव जलाकर फेंका गया था। पुलिस ने अज्ञात में मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी थी। सूचना मिलने के बाद परिजनों ने अल्याई मोहल्ला निवासी सावित्री के रूप में शिनाख्त की थी।
विवेचना दौरान पुलिस को महिला की पुत्री नेहा ने बताया कि मकान बनवाने के लिए उसके पिता बाबूलाल ने नफीस आदि से रुपये उधार लिए थे। नफीस का उसके घर आना-जाना था। मां को यह बात नागवार गुजरती थी। इसी बात को लेकर वह मां से खुुन्नस रखने लगा। घटना से दस-पंद्रह दिन पहले नफीस महोबा चला गया। वहां से फोन कर रुपये मांगने लगा। रुपये न देने के एवज में मकान का एग्रीमेंट करने की कहने लगा। 6 अप्रैल को फोन पर एग्रीमेंट करने की बात हुई। 5 अप्रैल को नफीस ने सावित्री से फोन पर बात कर मऊरानीपुर आने को कहा। इसके बाद 6 अप्रैल की शाम वह एग्रीमेंट करने के लिए मऊरानीपुर के लिए चली गई, लेकिन वह वहां पहुंची नहीं। अगले दिन उनकी जली हुई लाश मिली। पुलिस ने महिला की पुत्री के बयान को आधार बनाकर विवेचना की। विवेचना के दौरान पता चला कि प्लानिंग के अनुसार नफीस अपने साथी चांद बक्स उर्फ सूर्री के साथ कार से झांसी आया। उसने सावित्री को फोन कर कहा कि वह झांसी में है और मऊरानीपुर जा रहा है। इस पर सावित्री उनके साथ मऊरानीपुर के लिए चल दी। रास्ते में मौका पाकर कार में ही गला दबाकर हत्या के बाद शव जलाकर सड़क किनारे फेंककर दोनों भाग निकले थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान शनिवार को अदालत ने दोनों को हत्या में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।