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जिनके पास खेती नहीं उनको भी बेच दी पौने दो सौ बोरी खाद

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झांसी। लॉकडॉउन के दौरान खाद दुकानदारों ने जमकर खेल किया। लॉकडॉउन-2 के बाद जरूरी सेवाओं के नाम पर खाद की दुकानों को छूट दी गई लेकिन, कुछ दुकानदारों ने इसे घोटाला करने के अवसर में बदल दिया। उन्होंने उन किसानों के नाम से खाद बेच डाली जिनके नाम पर खेती की जमीन ही नहीं है। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के निर्देश पर हुई जांच में यह गड़बड़झाला सामने आया है। अब जाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
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खाद को लेकर इन दिनों पूरे प्रदेश में हायतौबा मची है। अफसरों की टीम लगातार निगरानी में जुटी है लेकिन, इसके पहले अप्रैल से जुलाई के बीच ही कुछ दुकानदारों ने बड़ा खेल कर दिया। दुकानदारों ने कालाबाजारियों के साथ मिलकर सैकड़ों टन खाद ऊंची कीमत में बाजार में खपा दी।
रबी सीजन में जहां किसान एक बोरी खाद के लिए तरस रहा था वहीं, इन दुकानदारों ने फर्जीवाड़ा करके सेटिंग कर एक किसान के नाम पर लाखों की खाद दे दी। एक किसान के नाम ही लाखों रुपये की खाद आवंटित होने का विवरण जब पोर्टल पर अपलोड हुआ तब केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अफसरों का माथा ठनका। उन्होंने मामले की जांच के लिए यूपी सरकार को पत्र लिखा। उसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में जांच शुरू कराई। जिलाधिकारी ने झांसी में जिला कृषि अधिकारी
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कमलेश कुमार सिंह, भूमि सरंक्षण अधिकारी मऊरानीपुर समेत तीन अधिकारियों की टीम को जांच सौंपी। टीम ने करीब एक हफ्ते तक 58 सहकारी खाद समितियों समेत अन्य के रिकॉर्ड खंगाले। इस दौरान दुकानदारों के कारनामे सामने आने लगे। मऊरानीपुर की खाद एजेंसी ने जिस एक किसान के नाम 189 बोरी खाद दी, उसके पास जमीन ही नहीं थी। रिकॉर्ड में भी जोतबही का कोई रिकार्ड दर्ज नहीं था। इसी तरह चिरगांव, पूछ, बड़ागांव की एंजसियों ने भी एक ही नाम पर सैकड़ों बोरी खाद दे दी। इनमें भी अधिकांश के जोतबही दर्ज नहीं है। कुल एक दर्जन एजेंसियों में गड़बड़ी पकड़ी गई। जांच के बाद अब कार्रवाई का शिकंजा इन दुकानदारों पर कसने जा रहा है हालांकि आगे जांच में अभी और भी दुकानदार शिकंजे में फंस सकते हैं।
कच्ची शराब गलाने में हो रहा इस्तेमाल
खेत में डालने के लिए किसान को खाद नहीं मिल रही थी वहीं, कालाबाजारी करने वाले इस खाद को शराब बनाने वाले धंधेबाजे के हवाले करके ऊंची कीमत वसूल रहे थे। जानकारी के मुताबिक झांसी में ही कच्ची शराब बनाने वाले यूरिया का इस्तेमाल भी जमकर करते हैं। कुछ दिनों पहले पुलिस ने इनके यहां छापेमारी करके वहां से यूरिया भी बरामद की थी लेकिन, कृषि अफसरों को इसकी भनक तक नहीं। जिला कृषि अधिकारी कमलेश सिंह का कहना है कि उनको इस बारे में कुछ भी नहीं मालूम है।
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