झांसी। रियो ओलंपिक शुरू होने में अब कुछ दिन ही बचे हैं। ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी झांसी के लाल तुषार खंडकर के दिए गए टिप्स के बलबूते जीत के ट्रैक पर सवार होंगे। लंदन ओलंपिक 2012 में भारतीय हॉकी टीम की ओर से हिस्सा ले चुके तुषार वर्तमान में राष्ट्रीय सीनियर हॉकी टीम के सहायक कोच हैं। उन्होंने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की परंपरा को आगे बढ़ाकर दुनियाभर में झांसी और देश का नाम रोशन किया है।
महानगर के नरसिंह राव टोरिया स्थित महाराष्ट्रीयन परिवार के सदस्य तुषार को बचपन से ही हॉकी का वातावरण मिला। राष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी रहे पिता स्व. विनोद खंडकर और क ई अंतर्राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके चाचा सुबोध खंडकर के नक्शेकदम पर चलने वाले तुषार को परिवार और अन्य लोगों से खूब प्रोत्साहन मिला। इसी के चलते उन्होंने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद और अपने परिवार की शानदार खेल परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कड़ी मेहनत की। लक्ष्मी व्यायाम मंदिर की मिट्टी पर खेलते हुए तुषार का चयन वर्ष 1999 में स्पोर्ट्स हास्टल बनारस में हुआ। इसी वर्ष उनके अंतर्राष्ट्रीय कैरियर की शुरुआत हुई और उनका अंडर-16 एशिया कप के लिए चयन हुआ।
टीम ने गोल्ड मेडल जीता। इस खिताबी मुकाबले में झांसी के लाल ने दनादन तीन गोल दागे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और देश की जूनियर व सीनियर टीम के महत्वपूर्ण सदस्य बनकर कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। इनमें कॉमनबेल्थ, विश्वकप हॉकी, ओलंपिक, चैंपियन्स ट्रॉफी, अजलन शाह ट्राफी आदि प्रमुख हैं। उनकी खेल प्रतिभा के मद्देनजर देश के हॉकी संघ ने उन्हें भारतीय हॉकी जूनियर टीम का कोच नियुक्त किया। वर्तमान में वह देश की सीनियर टीम के सहायक कोच हैं।
झांसी में स्थाई रूप से निवासरत तुषार खंडकर भोपाल में भारत पेट्रोलियम में मैनेजर हैं। वह आज भी भोपाल और झांसी के नवोदित खिलाड़ियों को टिप्स देते रहते हैं।
कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दिखाया जलवा
तुषार का कैरियर नवोदित खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक, वर्ष 2006 में जर्मनी में आयोजित सीनियर वर्ल्ड कप, वर्ष 2010 में भारत में हुए सीनियर वर्ल्ड कप, वर्ष 2004 में पाकिस्तान में और वर्ष 2005 में भारत में हुए चैंपियंस ट्रॉफी में देश का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा वर्ष 2006 कतर में और वर्ष 2010 चीन में हुए एशियन गेम्स, आस्ट्रेलिया में वर्ष 2006 में, वर्ष 2010 में भारत में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ष 2007 में भारत में तथा वर्ष 2009 में मलेशिया में हुए एशिया कप में भी अपनी प्रतिभा से खेल विशेषज्ञों को प्रभावित किया। मलेशिया में वर्ष 2009 में हुए अजलान शाह हॉकी टूर्नामेंट में भी उनका विशेष योगदान रहा। इसी के चलते भारत को गोल्ड मेडल मिला। इसके अलावा उन्होंने वर्ष 2005 में हालैंड में हुए जूनियर वर्ल्ड कप, हेमबर्ग मास्टर टूर्नामेंट, थ्री नेशंस हॉकी टूर्नामेंट आदि के अलावा वर्ष 2004 में हुए भारत पाक टेस्ट मैचों में हिस्सा लिया। कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत को गोल्ड, सिल्वर मेडल प्राप्त हुए।
स्पेन होते हुए रियो जाएंगे टीम के साथ
फारवर्ड पोजीशन में खेलने वाले तुषार मेजर ध्यानचंद के बाद पहले ऐसे हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया और फिर देश की टीम के कोच बने। पूर्व अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी सुबोध खंडकर ने बताया कि तुषार स्पेन होते हुए रियो ओलंपिक में शामिल होने के लिए टीम के साथ जाएंगे।
पाक के खिलाफ जबरदस्त रहा प्रदर्शन
तुषार का कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकि स्तान के खिलाफ हमेशा जबरदस्त प्रदर्शन रहा है। पाकिस्तान में वर्ष 2004 में हुए चैंपियंस ट्रॉफी के खिताबी मुकाबले में उन्होंने दो गोल कर टीम को शानदार जीत दिलाई। मलेशिया में वर्ष 2009 में हुए अजलान शाह ट्रॉफी के फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने शानदार खेल दिखाकर लोगों को प्रभावित किया।