झांसी। रेल मंडल के 791 पुल अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। बावजूद इनका प्रयोग रेलवे द्वारा किया जा रहा है। जबकि, उम्र पूरी कर चुके इन पुलों को बंद कर देना चाहिए या फिर इन्हें ढहा कर नए पुल का निर्माण होना चाहिए। लेकिन, रेलवे ने अभी तक ऐसा कोई प्रस्ताव तैयार नहीं किया है। अब सवाल यह है कि क्या किसी हादसे के बाद ही रेलवे इस ओर ध्यान देगा।
रेल मंडल में छोटे-बड़े पुलों की संख्या 2,488 है। इनमें 791 पुल सौ साल पुराने हो चुके हैं। इनमें बीना-आगरा कैंट रेल लाइन पर 309 पुल, झांसी- कानपुर रेल लाइन पर सात पुल, झांसी- मानिकपुर रेल लाइन पर 303, एट-कोंच रेल लाइन पर नौ, धौलपुर छोटी लाइन पर 46 व ग्वालियर-श्योपुर कलां छोटी लाइन पर 117 पुल शामिल हैं। आमतौर पर एक पुल की अधिकतम आयु सौ साल मानी जाती है। ऐसे में अपनी उम्र पूरी कर चुके इन पुलों के दुबारा निर्माण की जरूरत महसूस की जाने लगी है। लेकिन रेलवे अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस स्थिति में यदि कोई हादसा हो जाता है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।
वहीं, रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग पुलों की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच करने की बात कहता है। जनसंपर्क अधिकारी गिरीश कंचन ने बताया कि पुलों के रखरखाव पर ब्रिज विभाग की हर समय नजर रहती है। पुलों के बेस की जांच मशीनों से कराई जाती है। आवश्यकता होने पर इनकी मरम्मत कर दी जाती है। उन्होंने दावा किया कि मंडल के सभी पुल सुरक्षित हैं।
समिति ने तय कर रखी है पुलों की आयु
रेलवे बोर्ड द्वारा गठित समिति ने रेलवे संपत्तियों की औसत उम्र निर्धारित की है। बड़े पुलों की औसत आयु 40 से 100 साल मानी गई है। इसके अलावा स्टील वर्क्स के ब्र्रिज की 60 साल, मेसोनरी ब्रिज की 100, स्ट्रक्चर स्टील ब्रिज की 60, मेसोनरी एंड सीमेंट कंक्रीट की 65, आरसीसी ब्रिज की 60 व कंक्रीट ब्रिज की औसत उम्र चालीस साल तय की गई है।