संवाद न्यूज एजेंसी
चिरगांव। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त महाविद्यालय के भारत भारती सभागार में तुलसी जयंती के उपलक्ष्य में ‘तुलसीदास के काव्य में लोकमंगल की अवधारणा’ विषय पर व्याख्यानमाला हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. आशीष कुमार तिवारी ने कहा कि हिंदी साहित्य राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तुलसीदास की रामचरितमानस ने धार्मिक एकता के साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा दिया। इतिहास के सहायक प्राध्यापक डॉ. अशोक मुस्तरया ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सद्भाव, बंधुत्व, सहिष्णुता, उदारता और विश्व कल्याण की भावना निहित है। डॉ. हरीश कुमार ने तुलसीदास को भारतीय संस्कृति और जनमानस का महाकवि बताया। संजय कुमार गौतम ने कहा कि तुलसीदास की दृष्टि सर्वव्यापी और लोकमंगलकारी थी। वीरेंद्र कुमार ने कहा कि तुलसी ने श्रीराम के आदर्श स्वरूप को समाज में स्थापित किया। आकाश कुमार ने भक्ति के साथ सामाजिक चेतना के प्रसार को रेखांकित किया। सुनीता कृष्णा ने तुलसीदास को समन्वयवादी बताया।
कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापक संजीव कुमार ने किया। आभार इंद्रवेश आर्य ने जताया।