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पर्यटकों को रास नहीं आ रही ई - टिकट की व्यवस्था

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झांसी। किला घूमने आने वाले तमाम पर्यटकों के लिए ऑनलाइन टिकट की व्यवस्था परेशानी का सबब बनी हुई है। इसे लेकर सैलानियों और पुरातत्व विभाग के कर्मचारियों के बीच आए दिन नोकझोंक भी होती है। हालात ये हैं कि रोजाना कई पर्यटक तो बगैर किला घूमे ही वापस लौटने का मजबूर हो जाते हैं।
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बुंदेलखंड में पर्यटन के लिए सर्दी का मौसम सबसे मुफीद माना जाता है। नवंबर से लेकर फरवरी माह तक क्षेत्र सभी पर्यटन स्थल गुलजार बने रहते हैं। किले में भी इस अवधि में खूब भीड़ उमड़ती है। स्थानीय के साथ-साथ बाहरी जनपदों से आने वाले पर्यटकों की भी भरमार बनी रहती है। लेकिन, ऑनलाइन टिकट की व्यवस्था से तमाम लोगों को परेशानी उठानी पड़ जाती है। दरअसल, कोरोना काल में मैन्युअल टिकट जारी नहीं किए जा रहे हैं। पर्यटकों को सिर्फ ऑनलाइन टिकट का ही विकल्प दिया गया है। भारतीय पर्यटकों को एक टिकट की कीमत 30 और विदेशियों को 250 रुपये चुकानी पड़ती है। इसके लिए उन्हें मोबाइल पर क्यू आर कोड स्कैन करना होता है। इसके बाद टिकट जेनरेट होता है। लेकिन, कभी नेटवर्क की समस्या से टिकट जारी होने में विलंब होता है, तो कभी पैसे कटने के बाद भी टिकट नहीं आता है। पर्यटक मैन्युअल टिकट की मांग करते हैं। कर्मचारी इसे देने में हाथ खड़े कर देते हैं। इसे लेकर आए दिन यहां नोकझोंक होती रहती है। कई पर्यटक तो किले का भ्रमण किए बगैर ही वापस लौैैट जाते हैं।
देश के जितने भी स्मारक हैं, उन सभी के ई - टिकट ही जारी किए जा रहे हैं। कोराना काल में मैन्युअल टिकट की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। ये सुविधाजनक भी है। टिकट जारी कराने में सैलानियों की कर्मचारी पूरी मदद करते हैं।
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- अभिषेक सिंह, सर्वेक्षण सहायक
पैसे कट गए हैं, लेकिन टिकट जारी नहीं हुआ है। किले के कर्मचारी भी कोई सही जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। मजबूरन बगैर किलो घूमे ही वापस लौटना पड़ रहा है।
- योगेंद्र रस्तोगी
ऑनलाइन के साथ-साथ मैन्युअल टिकट का विकल्प भी पर्यटकों को दिया जाना चाहिए। पर्यटन के बढ़ावे के लिए पर्यटकों की सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए।
- रामकुमार
अब हर कोई तो ऑनलाइन टिकट जारी कराने की प्रक्रिया जानता नहीं है। ऐसे में सैलानियों को मैन्युअल टिकट की सुविधा भी दी जानी चाहिए।
- निखिल मिश्रा
ऑनलाइन टिकट की बात आते ही तमाम लोग तो बगैर किला देखे ही लौट जाते हैं। ये स्थिति पर्यटन के लिहाज से ठीक नहीं है। व्यवस्था बदलनी चाहिए।
- संजीव शर्मा
तमाम पढ़े लिखे लोग आज भी डिजिटल पेमेंट करना नहीं जानते हैं। ऐसे में ऑनलाइन टिकट जारी करने की व्यवस्था बेहतर नहीं है। मैन्युअल का विकल्प भी खोला जाना चाहिए।
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- मंजू
कोरोना काल में अब तो सभी व्यवस्था अपनी सामान्य रफ्तार पर चल पड़ी हैं। ऐसे में किले के टिकट की पुरानी व्यवस्था भी बहाल की जानी चाहिए।
- सुशांत वर्मा
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