कोरोना के दौर में पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर की मांग बढ़ी तो इसकी कालाबाजारी भी शुरू हो गई है। अब पल्स ऑक्सीमीटर झांसी में तीन गुने तो थर्मामीटर दोगुने दामों पर बिक रहे हैं। इस बीच प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई न होने से दरों में मनमानी जारी है और जनता को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
कोरोना संक्रमण फैलने से पहले शायद ज्यादातर लोगों ने पल्स ऑक्सीमीटर का नाम कम ही सुना हो लेकिन अब घर-घर में इसकी मांग बढ़ गई है। नतीजा यह हुआ कि तीन महीने पहले तक चुनिंदा मेडिकल सर्जिकल दुकानों पर मिलने वाला पल्स ऑक्सीमीटर अब मेडिकल की हर रिटेल दुकान पर मिलने लगा है। इसके अलावा थर्मामीटर की मांग भी बढ़ी है।
इस कारण इनके दामों में भी कालाबाजारी शुरू हो गई है। आज से तीन महीने पहले पल्स ऑक्सीमीटर 400 रुपये में मिल जाता था। लेकिन अब इसकी कीमत 1200 रुपये से भी अधिक पहुंच गई है। इसके अलावा थर्मामीटर भी दोगुने या अधिक मूल्य पर बिक रहा है।
बीपी मशीन से लेकर ग्लव्स तक के दाम बढ़े
हकीकत यह है कि जैसे-जैसे कोरोना का संक्रमण तेज हो रहा है, सर्जिकल सामानों की कीमतें भी उससे तेज बढ़ रही हैं। सर्जिकल ग्लव्स, बीपी मशीन, डायबिटीज मापने की मशीन की कीमतें पिछले तीन महीनों में दो से तीन गुना तक बढ़ गई हैं।
ये हुआ अंतर
उपकरण कोरोना से पहले अब
थर्मामीटर 100-125 150-250
थर्मल स्कैनर 500-1000 1500-2500
पल्स ऑक्सीमीटर 400-700 1200-2000
पल्स ऑक्सीमीटर, इंफ्रारेड आदि का सेंसर भारत में नहीं बनता है। यह चीन से ही आता है। चीन से आयात पर रोक लगने के कारण बड़े स्तर पर इसकी कालाबाजारी एक्सपोर्टर ही कर रहे हैं। इसलिए निचले स्तर पर भी इसके दाम बढ़ गए हैं।
- नितिन मोदी, सचिव, केमिस्ट एसोसिएशन झांसी
पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर की कालाबाजारी कतई नहीं होने दी जाएगी। इसके खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा, जो भी दुकानदार अधिक दामों पर यह उपकरण बेचता हुआ पाया गया, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- उमेश भारती, औषधि निरीक्षक, झांसी