महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के परिसर में चार साल बाद बनकर तैयार हुए सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में मंगलवार से मरीजों का इलाज शुरू होना था। लेकिन, पांच माह से भुगतान न होने से गुस्साए श्रमिकों ने इसके गेट पर ताला जड़ दिया, जिससे इसकी शुरुआत नहीं हो सकी। श्रमिकों को समझाने की कोशिशें बेकार रहीं। इससे मरीजों और डाक्टरों को बैरंग वापस लौटना पड़ा।
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी विभाग की अलग यूनिट बनी हैं। यहीं पर सभी छह विभाग के ओपीडी, 60-60 बेड के वार्ड, मॉड्यूलर और माइनर ओटी बने हैं। पांच दिन पहले लखनऊ में हुई शासन और मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों की बैठक में हर हाल में 15 नवंबर से पहले सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में ओपीडी शुरू करने के निर्देश दिए गए थे।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी पांच नवंबर से ओपीडी शुरू करने की तैयारी कर ली थी। मंगलवार को डॉक्टर ओपीडी शुरू करने पहुंचे तो बिल्डिंग निर्माण का काम करने वाले श्रमिकों ने ताला डाला हुआ था। डॉक्टरों के बातचीत करने के बाद भी मजदूर इस बात पर अड़े रहे कि जब तक उन्हें पांच महीने का बकाया मेहनताना नहीं मिल जाता है, तब तक वह ओपीडी शुरू नहीं होने देंगे। इसके बाद डॉक्टर वहां से लौट गए। मजदूरों ने बताया कि ब्लॉक के निर्माण में 80 से 90 लोग लगे हुए थे। इसमें मिस्त्री, मजदूर, सुपरवाइजर, सिक्योरिटी के लोग आदि शामिल हैं।
150 करोड़ से हुआ निर्माण
मेडिकल कॉलेज में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 150 करोड़ की लागत से पांच मंजिला सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक का निर्माण हुआ है। केंद्र में कांग्रेस सरकार के दौरान फरवरी 2014 में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री से इसकी घोषणा कराई थी। इसके बाद केंद्र में सरकार बदल गई। भाजपा सरकार ने इसे प्राथमिकता से लिया और निर्माण के लिए बजट दिया।
श्रमिक बोले
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में बतौर मिस्त्री काम करता रहा। ठेकेदार के कहने पर अपने साथ 30 मजदूर-मिस्त्रियों को भी काम पर लगाया था। सभी 31 लोगों का मिलाकर लगभग पांच लाख रुपये का भुगतान होना है। मई से एक भी पैसा नहीं मिला है।
- ठाकुरदास, चिरगांव
शुरुआत में तो भुगतान होता रहा, लेकिन पिछले पांच माह से मिलना बिल्कुल बंद हो गया। ब्लॉक के निर्माण में मैंने बतौर मिस्त्री काम किया, साथ में छह लोगों को और लगाया। कुल मिलाकर अभी 70 हजार रुपये मिलना बाकी है।
- चरण सिंह, मऊरानीपुर
सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के निर्माण में हमारी मेहनत लगी है। पिछले पांच महीनों से ठेकेदार आगे भुगतान करने की बात कहकर टालते रहे। जब तक हमें मेहनताना नहीं मिला जाता है, तब तक हम ब्लॉक में कामकाज शुरू नहीं होने देंगे।
- लक्ष्मी, चिरगांव
ब्लॉक की सिक्योरिटी का जिम्मा दिया गया था। अपने साथ पहले आठ लोगों को लगाया था। तीन लोग पैसा न मिलने की वजह से पहले ही काम छोड़कर चले गए। अब शेष बचे पांच लोगों का पौने दो लाख रुपये मिलना बाकी है।
- राजेंद्र तिवारी, महोबा
निर्माण कार्य करा रही कंपनी के अधिकारियों से बात हुई है। अधिकारियों ने जल्द ही इस समस्या का निपटारा कराने का आश्वासन दिया है। समस्या खत्म होते ही ओपीडी शुरू होगा।
- डॉ. सुधीर कुमार, नोडल अधिकारी, सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक