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सवारी गाड़ियों से हो रहे घाटे को माल लदान से किया जाएगा कम

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झांसी। रेलवे अब मालगोदामों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मॉडल) से विकसित करेगा। बदले में निवेश करने वाले कारोबारियों को अगले दस साल तक माल लदान के किराए पर रियायत मिलती रहेगी। अभी तक यह रियायत पांच साल तक मिलती थी। मंडल में दिसंबर में माल लदान से 82 करोड़ व यात्री गाड़ियों से 24 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। जबकि पिछले साल इसी महीने में माल लदान से 50 करोड़ रुपये व यात्री गाड़ियों से 60 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे। घाटे की भरपाई के लिए मालगोदाम विकसित किए जाएंगे।
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कोरोना काल में रेलवे सवारी ट्रेनों से हो रहे घाटे को माल लदान से कम कर रहा है। यही कारण है कि सवारी गाड़ियों से ज्यादा मालगाड़ी संचालन को प्राथमिकता दी जा रही है। झांसी मंडल ने खाद्यान्न और अन्य वस्तुओं के लदान में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें गुड्स शेड में सुधार, खाद्यान्नों की अतिरिक्त और नई यातायात धारा के लिए 30 प्रतिशत तक छूट का प्रावधान किया है। मंडल में झांसी, दतिया, मुरैना, रायरू ग्वालियर, टीकमगढ़, भीमसेन, पारीछा, गोगामऊ, रसूलपुर, बांदा, बिजौली, ललितपुर, उदयपुरा गुड्स शेड से मालगाड़ियों में लदान होती है। मगर अधिकांश गुड्स शेड (मालगोदाम) में सुविधाओं का अभाव है। मजदूरों के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है। बैठने के लिए छायादार जगह नहीं है। संपर्क मार्ग अच्छे नहीं हैं। रात में बिजली की उचित व्यवस्था नहीं रहती है। इन परिस्थितियों में काम करना बेहद मुश्किल होता है। चूंकि, रेलवे के पास अभी मालगोदामों पर सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए बजट नहीं है, इसलिए रेलवे ने मालगोदामों पर सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप पर काम करने का निर्णय लिया है। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
- गुड्स शेडं्स को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है। जो भी कारोबारी इसमें निवेश करेंगे, उनको अगले दस साल तक माल लदान के किराए में रियायत दी जाएगी।
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- संदीप माथुर, मंडल रेल प्रबंधक।
पैसेंजर ट्रेनों से रेलवे को हो रहा घाटा
झांसी। रेल मंडल में संचालित स्पेशल पैसेंजर ट्रेनों को मुसाफिर नहीं मिल रहे हैं। इस कारण प्रशासन उनको बंद करने पर विचार कर रहा है। कोरोना काल में झांसी से बांदा, ललितपुर से खजुराहो व झांसी से आगरा के बीच पैसेंजर ट्रेनों को आरक्षित स्पेशल ट्रेन बनाकर चलाया जा रहा है। मगर इन ट्रेनों में बेहद कम यात्री सफर कर रहे हैं। हर गाड़ी में यात्रियों की संख्या 50 से 100 तक रहती है। जबकि, एक गाड़ी की क्षमता एक हजार से अधिक यात्रियों की रहती है। इससे मंडल रेल प्रशासन को राजस्व की हानि हो रही है। जबकि, मंडल से संचालित स्पेशल एक्सप्रेस गाड़ियां भरकर चल रहीं हैं। जैसे कि खजुराहो- कुरुक्षेत्र एक्सप्रेस, झांसी- बांद्रा एक्सप्रेस, ग्वालियर- वाराणसी बुंदेलखंड एक्सप्रेस में यात्रा तिथि के अंतिम दिनों तक वेटिंग टिकट मिलना शुरू हो जाता है।
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