सौ एकड़ जमीन पर बनेगा ट्रांसपोर्ट नगर
झांसी। महानगर में ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना की दिशा में कार्यवाही ने जोर पकड़ लिया है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय के पास नगर निगम की सौ एकड़ जमीन आरक्षित कर ली गई है। इसे झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) विकसित करेगा। इसकी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
महानगर में दो सौ से अधिक ट्रांसपोर्ट संचालित हो रही हैं, जिनके माध्यम से रोजाना लगभग तीन हजार ट्रकों की आवाजाही होती है। ट्रांसपोर्ट संचालित करने व ट्रक खड़े करने के लिए अलग से कोई स्थान नहीं है। ज्यादातर ट्रांसपोर्ट न्यू रोड और कानपुर मार्ग पर आरटीओ ऑफिस के इर्दगिर्द संचालित की जा रही हैं। वहीं, ट्रक न्यू रोड के पास के मैदान में और कानपुर मार्ग पर खड़े कर दिए जाते हैं। इसके अलावा जहां जगह मिलती है, मजबूरी में चालकों को ट्रक वहीं खड़े करने पड़ जाते हैं। इसका एक खामियाजा यह भी है कि प्रशासन की तमाम कोशिशों के बाद भी ट्रकों की शहर के भीतर आवाजाही बनी रहती है। इससे यातायात तो बाधित होता ही है, साथ ही दुर्घटना का भी खतरा बना रहता है। अभी हाल ही में ट्राला की चपेट में आने से शिक्षा विभाग के लिपिक और उनके एक साथी मौत के आगोश में समा चुके हैं। आए दिन दुर्घटनाओं के मामले सामने आते रहते हैं।
शहर को इन समस्याओं से न जूझना पड़े, इसके लिए लंबे समय से अलग से ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना की मांग की जा रही है। अब ये मांग पूरी होती नजर आ रही है। ट्रांसपोर्ट नगर के लिए ग्वालियर मार्ग पर केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के पास नगर निगम का सौ एकड़ का एक विस्तृत भूखंड आरक्षित कर लिया गया है। तय हुआ है कि ट्रांसपोर्ट नगर का विकास जेडीए द्वारा किया जाएगा। इसे लेकर ट्रांसपोर्टरों व ट्रक ऑपरेटरों के साथ बैठक भी हो चुकी है। उनसे भी ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना को लेकर सुझाव मांगे गए हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जाएगा।
अलग से ट्रांसपोर्ट नगर बन जाने से शहर में भारी वाहनों का दबाव नहीं रहेगा। इसकी स्थापना की दिशा में कार्यवाही तेजी से जारी है। ग्वालियर मार्ग पर सौ एकड़ जमीन आरक्षित की गई है। झांसी विकास प्राधिकरण इसे विकसित करेगा।
- शिवसहाय अवस्थी, जिलाधिकारी
सुविधाओं का नहीं रखा जाता ध्यान
बुंदेलखंड ट्रक एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हैप्पी चावला ने बताया कि ट्रांसपोर्टर सरकार के खजाने में मोटा राजस्व देते हैं। ये सिलसिला ट्रक खरीदने पर वाहन पंजीकरण टैक्स के साथ शुरू हो जाता है। इसके बाद माल ढुलाई पर टैक्स दिया जाता है। सरकार को टोल टैक्स से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा ट्रकों से मिलता है। बावजूद, ट्रांसपोर्टरों व ट्रक आपरेटरों की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया जाता। गाड़ियां खड़ी करने तक के लिए कोई निर्धारित स्थान दिया नहीं गया है और जब ऐसे में गाड़ियां यहां-वहां खड़ी करते हैं, तो पुलिस कार्रवाई का शिकार बनना पड़ जाता है। ट्रांसपोर्ट नगर बनने से इन समस्याओं से छुटकारा मिलेगा। इसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी।