झांसी। सर्दी के मौसम में पड़ने वाले कोहरा को देखते हुए रेलवे ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार कोहरे में दस घंटे से अधिक समय तक चालकों से ट्रेन नहीं चलवाई जाएगी। मजबूरन रेल प्रशासन बीस प्रतिशत ट्रेनों को निरस्त करने की तैयारी कर रहा है।
रेल प्रशासन के लिए कोहरे में (पंद्रह दिसंबर से इकतीस जनवरी तक) ट्रेनों का संचालन चुनौती बन जाता है। कोहरे में अधिकांश ट्रेन दुर्घटनाएं रनिंग स्टाफ से अधिक काम लेने से होती हैं। रेल मंडल में कोहरे की सबसे अधिक मार झांसी-दिल्ली सेक्शन में पड़ती है।
आम दिनों में रनिंग स्टाफ को झांसी से नई दिल्ली सवारी गाड़ी ले जाने में छह से आठ घंटे का समय लगता है। जबकि, कोहरे में यही दूरी तय करने में पंद्रह से अठारह घंटे लग जाते हैं। दस घंटे बाद चालक दल को एक-एक मिनट गुजारना भारी पड़ता है। ऐसे में वह सेक्शन खाली देख ट्रेन को दौड़ाना शुरू कर देते हैं।
यही गलती अक्सर रेल दुर्घटना का कारण बन जाती है। झांसी से गुजरने वाले रेल ट्रैकों का संचालन मॉडीफाइड सेमी आटोमैटिक सिगनलिंग सिस्टम से जुड़ा हुआ है।
रेलवे बोर्ड ने इस बार साफ निर्देश दिए हैं कि ड्राइवर कोहरे में दस घंटे से अधिक ट्रेन नहीं चलाएगा। पंद्रह दिसंबर के पहले रनिंग स्टाफ के मेडिकल ड्यूज व अन्य प्रशिक्षण भी पूरे कराने के निर्देश दिए गए हैं। मालूम हो कि रेल मंडल में रोजाना एक सौ पच्चीस सवारी व सौ के लगभग मालगाड़ियों का संचालन होता है।
चालक व गार्डों को यह दिए गए निर्देश
लोको पायलट ऑटोमेटिक सिगनल को लाल होने की दशा में दिन में एक मिनट तथा रात में एवं कोहरे में दो मिनट रुकने के बाद अधिकतम 10 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से अगले सिगनल तक गाड़ी ले जाएंगे। गार्ड को ध्यान रखना होगा कि लोको पायलट निर्धारित गति से अधिक न चलें।
इसके साथ ही निर्धारित से अधिक गति पकड़ने या अन्य स्थितियों में लोको पायलट का ध्यान आकर्षित करने के लिए यथा शक्ति प्रयास करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर गार्ड धीरे-धीरे ब्रेक लगाएंगे। जब गाड़ी किसी ऑटोमेटिक सिगनल के लाल होने पर नियमानुसार रुकेगी, तब गार्ड पीछे की ओर लाल सिगनल दिखाएंगे।