झांसी। जिले की गरौठा तहसील में स्थित एरच नगरी देश के प्राचीन जगहों में से एक हैं। अब इसे पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। ताकि देश - विदेश से सैलानी और श्रद्धालु यहां आए। इसके लिए जिला योजना की बैठक में 15 लाख रुपये मंजूर किए गए है। इससे ढिकोली में हॉल बनेगा व सौर लाइट लगेगी। साथ ही झांसी - एरच पर्यटन रूट बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
एरच को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं है। असुर राज हिरण्याकश्यप ने अपने पुत्र भक्त प्रहलाद को ढिकौली पर्वत से फेंका था। होलिका ने अपने भाई हिरण्याकश्यप के कहने पर अपने प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में प्रवेश किया था। प्रहलाद तो ईश्वर की कृपा से बच गए। लेकिन होलिका नहीं बच सकी। हिरण्याकश्यप के वध के बाद होली की परंपरा शुरू हो गई। जो आज समूचे विश्व में उत्साह से मनाई जाती है। इसके अलावा मौर्य, नाग, हूण सहित कई राजवंशों का शासन भी एरच में रहा है। इसके प्रमाण सिक्कों में प्राप्त हुए है। एरच में सैलानी और श्रद्धालुओं ज्यादा से ज्यादा आए। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाने शुरू हो गए है। पर्यटन उप निदेशक आरके रावत ने बताया कि एरच का पर्यटन विकास किया जाएगा। इसके लिए स्वीकृत 15 लाख रुपये में ढिकौली पर्वत पर लोगों के ठहरने के लिए हॉल, सौर लाइट, पेयजल आदि की सुविधा होगी। होली की मान्यता संबंधी सूचना के लिए बोर्ड भी लगाया जाएगा।
एरच महोत्सव को मांगी वित्तीय मदद
एरच में सात, आठ व नौ मार्च को तीन दिवसीय एरच महोत्सव का आयोजन होगा। झांसी मंडल के पर्यटन विभाग ने महानिदेशक को पत्र भेजा है। इसमें अवगत कराया, कि स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान नरसिंह ने प्राचीन नगरी एरच में अवतार लिया था और होली के पर्व की शुरूआत भी इसी नगर से हुई थी। आयोजन के लिए 10 लाख रुपये का बजट दिया जाए।
एरच पर तैयार होगा पर्यटन साहित्य
पर्यटन विभाग झांसी - एरच पर्यटन रूट बनाने की प्रक्रिया में जुट गया है। इसमें पारीछा बांध, बिराठा पदमिनी शहीद स्थल, अमरगढ़ का किला, मोंठ का किला, लोहागढ़ का किला और एरच है। पर्यटन विभाग इसके लिए एरच का ब्रोजर बना रहा है। इसमें ढिकौली माता का मंदिर, ढीकांचल पर्वत, बेतवा नदी के घाट, ऐतिहासिक सिक्के व पुरा स्मारक आदि नजर आएंगे।