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कोराना वायरस से बुंदेलखंड के पर्यटन उद्योग को दस करोड़ से ज्यादा का झटका

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ओरछा। कोरोना वायरस की दहशत से पर्यटन उद्योग धड़ाम हो गया है। इस जानलेवा बीमारी ने विदेश से आने वाले पर्यटकों के कदम रोक दिए हैं। ओरछा समेत खजुराहो, धुवेला, दतिया, मांडू जैसे पर्यटन स्थलों से रौनक गायब हो गई है। घरेलू और देश विदेश के पर्यटकों की भीड़ नहीं पहुंच रही है। पर्यटन उद्योग को दस करोड़ रुपये से अधिक का झटका लग चुका है। होटल उद्योग भी सन्नाटे में है।
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इन पर्यटन स्थलों पर नवंबर से शुरू होकर मार्च के अंत तक ही मुख्य सीजन होता है। इसी दौरान विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं। मार्च के अंतिम सप्ताह या फिर अप्रैल के पहले हफ्ते के बाद यह संख्या कम होने लगती है। कोराना वायरस ने इस बार पूरे पर्यटन सीजन की रीढ़ तोड़ दी है। होटल उद्योग से लेकर पुरातत्व विभाग के टिकट बिक्री से आने वाले राजस्व तक को प्रभावित कर दिया है। ओरछा, खजुराहो , दतिया, मांडू व धुबेला में होने वाली पर्यटकों की आवक में करीब सत्तर फीसदी की कमी आई है।
इस उद्योग से जुड़े होटल रेस्टोरेंट, टूर व ट्रेवल कंपनी, गाइडों से मिली जानकारी के अनुसार सामान्य तौर पर ओरछा में हर माह दस हजार विदेशी पर्यटक आते हैं पर बीते फरवरी माह में चार हजार पर्यटक यहां पहुंचे हैं। इसी तरह खजुराहो में पंद्रह से बीस हजार पर्यटक हर महीने पहुंचते हैं पर बीते फरवरी में छह हजार पर्यटक आंकड़ों में दर्ज हैं। दतिया व धुवेला में भी तीन से चार हजार पर्यटक आते हैं। यहां पांच से सौ सात सौ पर्यटकों के पहुंचने के आंकड़े हैं। इस तरह बुंदेलखंड के इन पर्यटन स्थलों पर हर महीने सभी सेक्टरों को मिलाकर पंद्रह से बीस करोड़ रुपये की आमद होती है, पर करोना के कारण अचानक पर्यटकों की संख्या में सत्तर फीसदी के आसपास आई कमी के कारण पर्यटन उद्योग को एक महीने में दस करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
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पुरातत्व अधिकारी घनश्याम बाथम के अनुसार हर वर्ष पुरातत्वीय स्मारकों को देखने के लिए पूरे सीजन में ओरछा में करीब पचास हजार से अधिक विदेशी व देसी सैलानी पहुंचते हैं पर इस बार दिसंबर से लेकर अब तक बीस हजार का आंकड़ा बमुश्किल पार हो सका है। इसमें नमस्ते ओरछा महोत्सव के पर्यटक भी शामिल हैं।
ओरछा और खजुराहो के बीच पड़ने वाले धुवेला संग्रहालय पर भी इस बार के सीजन में पूरी तरह सन्नाटा है। होटल संचालकों के अलावा गाइडों की रोजीरोटी पर भी संकट आ गया है। विदेशी सैलानी न आने से गाइडों को परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
आशुतोष महाशाब्दे
सीनियर गाइड, धुबेला छतरपुर
ओरछा के स्मारकों को देखने आने वाले विदेश सैलानियों से होने वाली टिकट बिक्री कोराना वायरस से प्रभावित हुई है। कई ग्रुप कोराना के डर से कैंसल हुए हैं। पर्यटकों की संख्या को देखें तो करीब सत्तर फीसदी की कमी आई है। बुंदेलखंड के पर्यटन उद्योग के सभी सेक्टरों को देखा जाए तो फरवरी माह में ही करीब दस करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
मनीष शर्मा जनरल मैनेजर होटल ओरछा रिसोर्ट
सत्तर फीसदी पर्यटकों के ग्रुप कैंसल हुए हैं। कोराना के डर से पर्यटक नहीं आ रहे हैं। इससे गाइडों के सामने रोजरोटी का संकट खड़ा हो गया है।
संजय यादव गाइड
कोरोना के कारण होटल उद्योग की हालत बेहद खराब है, न केवल ओरछा बल्कि खजुराहो व दूसरे पर्यटन स्थलों पर इस पीक सीजन में भी होटल खाली पड़े हैं। निजी होटल संचालक शादी विवाह व देसी सैलानियों के भरोसे किसी तरह अपने होटल के रखरखाव व कर्मचारियों का खर्च निकाल पा रहे हैं। कोरोना ने पर्यटन उद्योग को भी आईसीयू में ला दिया है।
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संजय मल्होत्रा पर्यटन विकास निगम के मैनेजर
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