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उद्घाटन के दिन से ही बंद पड़ी है टोकन प्रणाली

Sat, 09 Jul 2016 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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railway, jhansi hindi news - फोटो : demo
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झांसी। एक महीने पहले रेलवे आरक्षण कार्यालय में टोकन प्रणाली का उद्घाटन किया गया था, लेकिन यह मशीन उसी दिन से ठप है। इसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है।
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रेलवे आरक्षण में पारदर्शिता लाने के लिए कार्यालय में टोकन की कंप्यूटराइज्ड दो मशीनें लगाई गई है। इस मशीन पर हाथ का पंजा रखने रखने पर संबंधित व्यक्ति को टोकन जारी हो जाता है। इस व्यवस्था में एक व्यक्ति एक फार्म पर एक ही टोकन ले सकता है। टोकन प्रणाली को लगाने का ठेका भोपाल की एक कंपनी को दिया गया है। विगत नौ जून को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने रेलवे आरक्षण कार्यालय में टोकन प्रणाली का शुभारंभ किया था, लेकिन एक माह बाद भी इस योजना का लाभ यात्रियों को मिलना शुरू नहीं हुआ है। जनसंपर्क अधिकारी गिरीश कंचन ने बताया कि टोकन प्रणाली को शुरू करने में कुछ तकनीकी समस्याएं आ रही हैं। एसएनटी विभाग उन कमियों को दूर करने में लगा हुआ है। जल्द ही टोकन प्रणाली को चालू कर लिया जाएगा।

टोकन मिलने से यह हो जाएंगे लाभ
- तत्काल टिकट के लिए टोकन क्रम से मिलेगा। इससे वर्तमान व्यवस्था पर उठने वाले सवाल खत्म हो जाएंगे।
- टोकन नंबर आने में समय होने पर यात्री अपने दूसरे काम भी निपटाने जा सकता है।
- कतार में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। हॉल में ही बेंच पर बैठकर मैग्जीन, मोबाइल आदि पर अपना समय काट सकता है।
- स्टेशन पर रहकर यात्री ट्रेनों में आरक्षण की स्थिति का पता कर सकते है।
- एक टोकन पर एक फार्म पर ही आरक्षण मिलेगा। इससे यात्रियों के जल्दी- जल्दी आरक्षण टिकट बन सकेंगे।

तत्काल टोकन पर उठते हैं सवाल
यात्रियों के पास ट्रेनों में अंतिम समय आरक्षण पाने के लिए गाड़ी के प्रारंभिक स्टेशन से एक दिन पहले मिलने वाले तत्काल टिकट का ही सहारा होता है। सुबह दस से ग्यारह बजे तक वातानुकूलित कोचों और ग्यारह से बारह बजे तक स्लीपर क्लास में तत्काल आरक्षण लेने की व्यवस्था कर रखी है। हर रोज तत्काल में आरक्षण पाने के लिए आरक्षण कार्यालय में भीड़ लगी रहती है। अभी झांसी स्थित आरक्षण कार्यालय में तत्काल फार्म पर टिकट बनवाने के लिए सुबह साढ़े आठ बजे से टोकन नंबर जारी किए जाते हैं। एक फार्म पर एक ही टोकन जारी किया जाता है। संबंधित कर्मचारी टोकन नंबर को फार्म पर ही लिख देता है। इस व्यवस्था पर शुरू से ही सवाल खड़े होते रहे हैं। यात्रियों की शिकायत रहती है कि संबंधित कर्मचारी शुरूआती एक - दो टोकन नंबरों को बचाकर अपने लोगों को जारी कर देते हैं।
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