झांसी। 31 मार्च तक पूर्ण नहीं होने वाले शौचालय ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत सचिवों के लिए गले की फांस बन सकते हैं। सरकार उन्हीं शौचालयों का पैसा खर्च मानेगी, जिनकी एमआईएस फीडिंग 31 मार्च तक हो जाएगी। 31 मार्च के बाद वित्तीय वर्ष 2015-16 के कार्यों की फीडिंग नहीं हो पाएगी।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव-गांव में बनाए जा रहे शौचालय केंद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल हैं। शौचालय निर्माण के लिए वित्तीय वर्ष 2015-16 में जिला योजना में 8100 का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसे बढ़ाकर केंद्र सरकार के निर्देश पर नवंबर 2015 में 22841 कर दिया गया था।
12,000 रुपये प्रति शौचालय के हिसाब से जिला पंचायत राज विभाग ने अब तक 8775 शौचालयों के लिए पैसा जारी कर दिया है, इसमें से महज 3927 शौचालय ही पूर्ण हो सके हैं। करीब दो हजार शौचालय निर्माणाधीन हैं और अन्य शुरू ही नहीं हुए हैं।
शुरू नहीं होने वाले शौचालय से ज्यादा अपूर्ण शौचालय परेशानी का सबब बनेंगे। पहले वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद भी सरकार अधिकारियों पर उदारता दिखाते हुए लक्ष्य पूरा करने के लिए महीनों का बोनस समय दे देती थी, लेकिन अब सब व्यवस्था ऑनलाइन होने के कारण यह बोनस समय नहीं मिल पाएगा।
पहले शौचालय निर्माण के बाद मैनुअल उसका सत्यापन होता था। लेकिन, अब शौचालय निर्माण के बाद उसकी एमआईएस फीडिंग और फीडिंग के बाद एंड्रॉयड सॉफ्टवेयर से निर्मित शौचालय की फोटो अपलोड की जाती है।
सॉफ्टवेयर से अपलोड होने वाली फोटो में स्थान का अक्षांश व देशांश भी दर्शाया जाता है। ऐसे में फोटो अपलोडिंग में फर्जीवाड़ा होना संभव नहीं है। वित्तीय वर्ष 2015-16 की एमआईएस फीडिंग 31 मार्च के बाद संभव नहीं हो पाएगी। ऐसे में जो शौचालय निर्माणाधीन होंगे, उन पर हुए खर्च को शासन मानेगा नहीं। ऐसे में खर्च हुआ पैसा फंस सकता है।