झांसी। मोहर्रम की दसवीं तारीख को यानी रविवार को यौम-ए-आशूरा मनाया जाएगा। इस बार मोहर्रम पर कोरोना संक्रमण के चलते जिला प्रशासन ने ताजियों, बुर्राकों, अखाड़ों व मातमी जुलूस पर पाबंदी लगा दी है। इस कारण लोग घरों में कर्बला के शहीदों को याद करेंगे। घरों में शहीदों के नाम पर फातिहा कराया जाएगा। उलमा ने भी लोगों से घरों रहकर इबादत करने की अपील की है।
कोरोना संक्रमण के खतरे के चलते सरकार ने सभी धार्मिक आयोजनों पर पाबंदी लगा दी है। वहीं मोहर्रम के मौके पर घरों व इमामबाड़ों पर स्थापित किए जाने वाले ताजियों व बुर्राकों को भी प्रशासन से अनुमति नहीं दी गई है। इस बार मातमी जुलूस, ताजियों व बुर्राकों का भ्रमण नहीं होगा। इसके चलते इस बार लोगों को अपने घरों में ही रहकर करबला के शहीदों को याद करना पड़ेगा। मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया की यौम-ए-आशूरा की बड़ी फजीलत है। इस दिन अल्लाह तआला ने फिरऔन को गर्क कर मूसा अलैहिस्लाम को दरिया पार कराया था। आशूरा के दिन ही कयामत होगी। यौम-ए- आशूरा की नौ, दस व ग्यारह तारीख को रोजा रखने से एक साल के गुनाह माफ किए जाते हैं। मोहर्रम के दिन लोगों को घरों में रहकर ही अल्लाह की इबादत करना चाहिए। इसी दिन हजरत इमाम हुसैन की कर्बला में शहादत हुई थी। इसलिए शिया हजरत फाका रखकर और मातम कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश करते हैं।